पाकिस्तान की न्यायपालिका 27वें संविधान संशोधन के बाद गहरे संकट में फंस गई है। लाहौर हाई कोर्ट के जज जस्टिस शम्स महमूद मिर्जा ने संशोधन के विरोध में इस्तीफा देकर हालात को और गंभीर बना दिया। उन्होंने कहा कि संशोधन के बाद वह ईमानदारी से पद पर बने नहीं रह सकते। जस्टिस मिर्जा 2014 से लाहौर हाई कोर्ट में सेवाएँ दे रहे थे।
दो सुप्रीम कोर्ट जज पहले ही दे चुके हैं इस्तीफा
इससे पहले सुप्रीम कोर्ट के जज जस्टिस मंसूर अली शाह और जस्टिस अत्तर मिनल्लाह भी इस्तीफा दे चुके हैं। जस्टिस शाह ने अपने पत्र में संशोधन को न्यायपालिका को कमजोर करने वाला बताया, वहीं जस्टिस मिनल्लाह ने कहा कि संशोधन के बाद संविधान "अपने मूल रूप में रह ही नहीं गया"।
न्यायपालिका में असंतोष बढ़ा
लगातार इस्तीफों के बाद न्यायपालिका के भीतर विरोध तेज हो गया है। सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस सलाहुद्दीन पन्हवार ने संशोधन की फुल-कोर्ट समीक्षा की मांग की है। वहीं इस्लामाबाद हाई कोर्ट की जज सामन रफात इम्तियाज और जस्टिस मोहसिन अख्तर कयानी ने संकेत दिया है कि वे आने वाले महीनों में कोर्ट नहीं बैठेंगे।
लगातार बढ़ते विरोध और इस्तीफों ने पाकिस्तान की न्यायिक व्यवस्था को भारी उथल-पुथल में डाल दिया है और आने वाले दिनों में संकट और गहराने की आशंका है।

