हिमालय की गोद में प्रगति की नई राह: USBRL परियोजना की सुरंगें बनीं भारत की इंजीनियरिंग शक्ति की मिसाल
12 अप्रैल 2025, श्रीनगर
हिमालय की ऊँचाइयों में भारतीय रेल का सपना अब साकार हो चुका है। उधमपुर-श्रीनगर-बारामुला रेल लिंक (USBRL) परियोजना की सुरंगें न केवल कश्मीर को देश के अन्य हिस्सों से जोड़ने का माध्यम बन रही हैं, बल्कि यह भारत की अभूतपूर्व इंजीनियरिंग क्षमता की झलक भी प्रस्तुत करती हैं।
इस परियोजना के अंतर्गत 272 किलोमीटर लंबी रेलवे लाइन में 36 प्रमुख सुरंगें शामिल हैं, जो कुल 119 किलोमीटर तक फैली हैं। इन सुरंगों का निर्माण भूगर्भीय चुनौतियों, दुर्गम पहाड़ियों और प्राकृतिक आपदाओं के बीच किया गया है।
T-50: भारत की सबसे लंबी परिवहन सुरंग
सुम्बर और खरी के बीच 12.77 किलोमीटर लंबी T-50 सुरंग भारत की सबसे लंबी परिवहन सुरंग है। न्यू टनलिंग मेथड से बनी इस सुरंग में एक समानांतर सुरक्षा मार्ग भी है, जिससे सुरक्षा और सुविधा दोनों सुनिश्चित होती है।
T-80: पीर पंजाल के नीचे जीवनरेखा
11.2 किलोमीटर लंबी T-80 सुरंग जम्मू और कश्मीर को सालभर जोड़े रखने वाली रीढ़ साबित हो रही है। यह सुरंग ऊँचाई और बर्फबारी की चुनौतियों को पार कर यातायात को सुगम बनाती है।
अन्य प्रमुख सुरंगें और उनकी विशिष्टताएँ
T-34 सुरंग, दोहरी टनल संरचना का उत्कृष्ट उदाहरण है जो अंजी खड्ड पुल से जुड़ती है। T-33 सुरंग त्रिकुट पर्वत के नीचे भूगर्भीय जटिलताओं से जूझकर बनी है। T-23 सुरंग बिना बैलास्ट की ट्रैक प्रणाली के साथ तकनीकी नवाचार दर्शाती है, वहीं T-1 और T-25 सुरंगों ने पानी के रिसाव और भूमिगत धाराओं जैसी प्राकृतिक चुनौतियों से लड़ते हुए सफलता पाई है।
प्रगति की राह में नवाचार और संकल्प की जीत
इन सुरंगों के निर्माण में "आई-सिस्टम ऑफ टनलिंग", एडिट्स, पाइप रूफिंग, केमिकल ग्राउटिंग जैसी उन्नत तकनीकों का प्रयोग किया गया। यह परियोजना न केवल इंजीनियरिंग की दृष्टि से महत्वपूर्ण है, बल्कि यह सामाजिक और आर्थिक दृष्टि से भी कश्मीर घाटी के विकास की नई राह खोलती है।
USBRL की ये सुरंगें अब भारत की उस सोच का प्रतीक हैं, जो कहती है—कोई भी पहाड़ प्रगति के मार्ग में बाधा नहीं बन सकता।
