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डॉ.ए.के. अग्रवाल बने कामधेनु विश्वविद्यालय, दुर्ग के नए लोकपालछात्रों की शिकायतों के निवारण हेतु निष्पक्ष भूमिका निभाएंगे

डॉ. ए.के. अग्रवाल बने कामधेनु विश्वविद्यालय, दुर्ग के नए लोकपाल
छात्रों की शिकायतों के निवारण हेतु निष्पक्ष भूमिका निभाएंगे

दुर्ग, 15 अप्रैल।
दाऊ श्री वासुदेव चन्द्राकर कामधेनु विश्वविद्यालय, दुर्ग में यूजीसी के निर्देशानुसार डॉ. ए.के. अग्रवाल को विश्वविद्यालय का लोकपाल नियुक्त किया गया है। उनका कार्यकाल तीन वर्षों का होगा। लोकपाल के रूप में डॉ. अग्रवाल छात्रों द्वारा की जाने वाली शिकायतों जैसे फीस, परीक्षा, रैगिंग एवं भेदभाव जैसे मुद्दों की निष्पक्ष जांच करेंगे तथा कॉलेज प्रशासन और छात्रों के बीच संवाद स्थापित कर समस्याओं का समाधान करेंगे।

डॉ. अग्रवाल कॉलेज ऑफ डेयरी साइंस एंड फूड टेक्नोलॉजी, रायपुर में डेयरी इंजीनियरिंग के प्रोफेसर रह चुके हैं। साथ ही, उन्होंने लगभग डेढ़ वर्षों तक उक्त कॉलेज में डीन के पद पर भी कार्य किया है। उनके पास शिक्षण और अनुसंधान का 40 वर्षों से अधिक का समृद्ध अनुभव है, जिसमें 20 वर्षों का स्नातकोत्तर स्तर का अनुभव भी शामिल है।

उन्होंने डेयरी इंजीनियरिंग व फूड टेक्नोलॉजी के क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान देते हुए करीब 20 स्नातकोत्तर छात्रों के शोध कार्यों का मार्गदर्शन किया है। उनके निर्देशन में छात्रों द्वारा विकसित किए गए दुग्ध प्रोसेसिंग उपकरणों को भारतीय डेयरी इंजीनियर्स एसोसिएशन के राष्ट्रीय सम्मेलनों में भी मान्यता मिली है।

डॉ. अग्रवाल के नाम लगभग 70 शोध पत्र राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय पत्रिकाओं में प्रकाशित हैं। उनकी लिखित पुस्तक "Processing Technologies for Milk and Milk Products" को USA की Apple Academic Press द्वारा प्रकाशित किया गया है, जो डेयरी क्षेत्र में उनका महत्वपूर्ण योगदान दर्शाता है।

हाल ही में उन्होंने राष्ट्रीय कृषि विकास योजना (RKVY) के तहत ₹4.15 करोड़ की लागत वाली “शून्य ऊर्जा एकीकृत लघु दुग्ध उत्पादन एवं प्रसंस्करण संयंत्र” परियोजना में प्रधान अन्वेषक के रूप में कार्य किया है। 10,000 लीटर प्रतिदिन क्षमता वाला यह आधुनिक संयंत्र रायपुर स्थित कॉलेज में स्थापित हो चुका है और शीघ्र ही चालू होने की संभावना है।

डॉ. अग्रवाल ने नवोदित डेयरी उद्यमियों के लिए आयोजित तकनीकी कार्यक्रमों के माध्यम से डेयरी प्रोसेसिंग ज्ञान के प्रचार-प्रसार में सराहनीय भूमिका निभाई है और वह निरंतर इस दिशा में प्रयासरत हैं। उनकी नियुक्ति से विश्वविद्यालय में छात्रों की समस्याओं के निराकरण की प्रक्रिया और अधिक प्रभावशाली और पारदर्शी होने की उम्मीद है।

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