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छत्तीसगढ़ में संभावनाएं तलाश रहा वॉटर एप्पल- पोषण, औषधीय गुण और आर्थिक लाभ से भरपूर यह फल बन सकता है ग्रामीण समृद्धि का आधार



छत्तीसगढ़ में संभावनाएं तलाश रहा वॉटर एप्पल
- पोषण, औषधीय गुण और आर्थिक लाभ से भरपूर यह फल बन सकता है ग्रामीण समृद्धि का आधार

बिलासपुर। जावा एप्पल, रोज एप्पल या वाॅक्स एप्पल... कई नामों से जाना जाता है यह फल, लेकिन आमतौर पर पहचाना जाता है वॉटर एप्पल के रूप में। अपने पोषण, औषधीय गुणों और आर्थिक दृष्टि से लाभकारी पहलुओं के कारण अब यह फल छत्तीसगढ़ में ग्रामीण समृद्धि का आधार बनने की ओर अग्रसर है। वानिकी वैज्ञानिक इसकी व्यावसायिक खेती की संभावनाओं पर तेजी से काम कर रहे हैं।

वन अनुसंधान संस्थानों, कृषि विज्ञान केन्द्रों और निजी नर्सरियों में वॉटर एप्पल के encouraging परिणाम सामने आए हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि छत्तीसगढ़, विशेषकर दक्षिणी हिस्से की उष्णकटिबंधीय और अर्ध-उष्णकटिबंधीय जलवायु इस फल की खेती के लिए अत्यंत अनुकूल है। आने वाले समय में यह फल न केवल पोषण सुरक्षा प्रदान कर सकता है, बल्कि ग्रामीण अर्थव्यवस्था को भी नया आधार दे सकता है।


इसलिए छत्तीसगढ़ के लिए विशेष

छत्तीसगढ़ की विविध जलवायु और पारिस्थितिकी प्रणाली इसे वॉटर एप्पल के लिए एक आदर्श राज्य बनाती है। राज्य के दक्षिणी जिलों—बस्तर, कांकेर और कोरबा—में दोमट मिट्टी, गर्म तापमान और वर्षा आधारित खेती जैसे तत्व इस फल की खेती के लिए अनुकूल वातावरण प्रदान करते हैं। ऐसे ही वातावरण में वॉटर एप्पल की बेहतर बढ़वार देखी गई है।


संभावना और उपयोगिता

शोध में पता चला है कि बिलासपुर, रायपुर, कोरबा, कांकेर और बस्तर जिलों में वॉटर एप्पल के पेड़ पहले से मौजूद हैं। यद्यपि यह फल अभी निजी बागवानी तक सीमित है, लेकिन कृषि विज्ञान केन्द्रों, नर्सरियों और अनुसंधान संस्थानों में इसकी बढ़ती उपस्थिति रुझान को स्पष्ट करती है। इसके औषधीय गुण—जैसे पाचन सुधार, मधुमेह नियंत्रण और त्वचा रोगों से राहत—इसे स्वास्थ्य के लिए अत्यंत उपयोगी बनाते हैं।


जानिए वॉटर एप्पल को

वॉटर एप्पल का पौधा जामुन के वृक्ष के समान दिखता है और इसके फल घंटी के आकार के होते हैं। ये फल लाल, गुलाबी या हरे रंग के हो सकते हैं और स्वाद में हल्के मीठे व अत्यंत रसीले होते हैं। इसका उपयोग जूस, जैम, जैली के अलावा फेस पैक और स्किन टोनर जैसे सौंदर्य प्रसाधनों में भी किया जा सकता है। ज़रूरत है केवल गुणवत्तायुक्त रोपण सामग्री और वैज्ञानिक पद्धति से खेती की।


पोषण सुरक्षा हेतु आवश्यक

इस दिशा में कार्यरत बीटीसी कॉलेज ऑफ एग्रीकल्चर रिसर्च स्टेशन, बिलासपुर के वैज्ञानिक अजीत विलियम्स के अनुसार—
“छत्तीसगढ़ की पारिस्थितिकी व जलवायु वॉटर एप्पल के लिए अत्यंत अनुकूल है। यदि गुणवत्ता युक्त रोपण सामग्री, प्रशिक्षण और बाजार से जुड़ाव सुनिश्चित किया जाए, तो यह फल पोषण सुरक्षा और ग्रामीण आर्थिक विकास दोनों में सहायक सिद्ध हो सकता है।”


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