भाजपा की हठधर्मिता और नियम उल्लंघन से जिला पंचायत में दो समितियों का निर्वाचन टला
कांग्रेस नेता त्रिलोक श्रीवास ने उठाए गंभीर सवाल, कहा – अनुभवहीन नेतृत्व के कारण बनी हास्यास्पद स्थिति
बिलासपुर।
जिला पंचायत बिलासपुर में मंगलवार को वन एवं पर्यावरण तथा निशक्तजन कल्याण स्थायी समितियों के सभापति और सदस्य चयन की प्रक्रिया हंगामे और विरोध के चलते अधूरी रह गई। पर्याप्त सदस्य संख्या नहीं होने और नियमों की अनदेखी के आरोपों के बीच यह चुनाव नहीं हो सका। कांग्रेस पार्टी ने इसे सत्ता पक्ष की हठधर्मिता और अवैधानिक प्रक्रिया का परिणाम बताया है।
राष्ट्रीय कांग्रेस कमेटी के उत्तर प्रदेश एवं गुजरात प्रभारी, बिलासपुर जिले के वरिष्ठ कांग्रेस नेता श्री त्रिलोक चंद्र श्रीवास ने स्पष्ट आरोप लगाए कि भाजपा के अनुभवहीन नेतृत्व और मनमानी रवैये ने जिला पंचायत की गरिमा को ठेस पहुंचाई है। उन्होंने बताया कि उनकी धर्मपत्नी एवं जिला पंचायत सदस्य श्रीमती स्मृति त्रिलोक श्रीवास ने इस अव्यवस्था पर विधिवत आपत्ति दर्ज कराई थी।
कांग्रेस का आरोप: नियमों की धज्जियां उड़ाई गईं
कांग्रेस सदस्यों के अनुसार, स्थायी समितियों के गठन में पूर्व से तय सदस्य संख्या पाँच होती थी, लेकिन जिला पंचायत अध्यक्ष ने भाजपा समर्थित सदस्यों को निर्वाचित कराने के उद्देश्य से सदस्य संख्या तीन कर दी। यदि पाँच सदस्यीय प्रणाली को यथावत रखा गया होता, तो सभी समितियों का निर्वाचन संभव था और प्रतिनिधित्व संतुलित रहता।
पहली बार दो समितियों का निर्वाचन अधूरा
श्री त्रिलोक श्रीवास ने कहा कि यह बिलासपुर जिले के इतिहास में पहली बार हुआ है कि बहुमत में रहते हुए भी भाजपा के नेताओं के अनुभवहीन और मनमानी भरे रवैये के कारण दो समितियों का सभापति नियुक्त नहीं हो सका। यह न केवल हास्यास्पद है, बल्कि भाजपा नेतृत्व की अक्षमता को भी उजागर करता है।
कांग्रेस ने मांगा हस्तक्षेप
कांग्रेस ने इस अव्यवस्था के लिए जिला प्रशासन और पंचायत मंत्री से हस्तक्षेप की मांग की है, ताकि भविष्य में लोकतांत्रिक प्रक्रियाओं का पालन सुनिश्चित हो और पंचायत प्रणाली की विश्वसनीयता बनी रहे।
