रतनपुर। नेशनल हाईवे पर रतनपुर से पेंड्रा तक सड़क निर्माण कार्य जारी है, लेकिन इस कार्य में घोर लापरवाही बरती जा रही है। सड़क निर्माण स्थल पर अनिवार्य सूचना पटल और संकेतक बोर्ड नहीं लगाए गए हैं, जिससे वाहन चालकों को भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। ठेकेदार की मनमानी और प्रशासन की अनदेखी से दुर्घटनाओं की आशंका बढ़ गई है।
पेंड्रा-रतनपुर हाईवे बना 'मौत का रास्ता'!
इस हाईवे पर निर्माण कार्य शुरू होने के बाद से ही हादसों की संख्या में इजाफा हुआ है। स्थानीय नागरिकों और वाहन चालकों के अनुसार—
सड़क पर कई जगह गड्ढे खोदे गए हैं, लेकिन उनके आसपास कोई संकेतक बोर्ड नहीं लगाया गया है।
कई जगहों पर डायवर्जन बना दिया गया है, लेकिन न तो दिशा-निर्देश दिए गए हैं और न ही रात में दिखने वाले रिफ्लेक्टिव बोर्ड लगाए गए हैं।
सड़क पर उड़ती धूल इतनी घनी हो जाती है कि सामने से आने वाले वाहन तक दिखाई नहीं पड़ते, जिससे टकराव की संभावना बढ़ जाती है।
गिट्टी और मिट्टी के कारण सड़क पर जबरदस्त फिसलन है, जिससे दोपहिया और चारपहिया वाहनों का नियंत्रण बिगड़ रहा है।
निर्माण कार्य के कारण जगह-जगह मिट्टी और गड्ढे बने हुए हैं, जिससे वाहन चालकों को हर वक्त दुर्घटना का डर बना रहता है।
स्थानीय निवासियों ने बताया कि बीते दो महीनों में इस मार्ग पर सड़क की खराब स्थिति के कारण कई दुर्घटनाएं हो चुकी हैं, जिनमें से कुछ में लोगों को गंभीर चोटें भी आई हैं।
खुलेआम उड़ाई जा रही हैं नियमों की धज्जियां!
किसी भी शासकीय निर्माण कार्य में पारदर्शिता बनाए रखने के लिए यह अनिवार्य होता है कि कार्य स्थल पर एक सूचना पटल लगाया जाए, जिसमें निम्नलिखित जानकारी हो:
✔ परियोजना का नाम
✔ स्वीकृत लागत राशि
✔ सड़क की लंबाई
✔ ठेकेदार का नाम और अनुबंध संख्या
✔ कार्य प्रारंभ और समाप्ति की तिथि
✔ संबंधित अधिकारियों के नाम व संपर्क नंबर
लेकिन इस महत्वपूर्ण परियोजना में इन सभी नियमों को ताक पर रख दिया गया है। ठेकेदार और संबंधित विभागीय अधिकारी इस नियम का पालन नहीं कर रहे हैं, जिससे न केवल पारदर्शिता खत्म हो रही है, बल्कि निर्माण कार्य में अनियमितताओं की गुंजाइश भी बढ़ रही है।
संकेतक बोर्ड नहीं, हादसों को न्योता!
सड़क निर्माण कार्य के दौरान संकेतक बोर्डों की मौजूदगी बेहद जरूरी होती है। ये बोर्ड वाहन चालकों को संभावित खतरों से आगाह करने के लिए लगाए जाते हैं, ताकि वे सावधानी से वाहन चला सकें। लेकिन इस निर्माण स्थल पर ऐसा कोई बोर्ड नहीं लगाया गया है।
खुदी हुई सड़कें और गड्ढे वाहन चालकों के लिए खतरा बने हुए हैं।
कई जगहों पर डायवर्जन हैं, लेकिन उनके बारे में कोई जानकारी नहीं दी गई है।
घनी धूल के कारण वाहन चालकों को ठीक से रास्ता नहीं दिखता, जिससे टक्कर और दुर्घटनाओं की आशंका बनी रहती है।
सड़क पर बिखरी गिट्टी और मिट्टी के कारण दोपहिया वाहन फिसलकर गिर रहे हैं, जिससे कई लोग घायल हो चुके हैं।
अंधेरे में और बारिश के दौरान ये स्थान और भी खतरनाक हो जाते हैं।
संकेतक बोर्डों की कमी से दुर्घटनाओं का खतरा लगातार बना हुआ है, लेकिन संबंधित विभाग इस गंभीर लापरवाही पर कोई ध्यान नहीं दे रहा।
कंपनी और ठेकेदार की मनमानी, प्रशासन मौन!
सूत्रों के अनुसार, ठेकेदार को ठेका देते समय यह स्पष्ट किया गया था कि सड़क निर्माण के दौरान सभी सुरक्षा मानकों का कड़ाई से पालन करना होगा। लेकिन ठेकेदार ने इन नियमों की अनदेखी करते हुए मनमानी शुरू कर दी है।
क्या ठेकेदार को सरकारी नियमों का उल्लंघन करने की खुली छूट दी गई है?
अगर इस लापरवाही के कारण कोई गंभीर हादसा होता है, तो इसकी जिम्मेदारी कौन लेगा?
यह रवैया बेहद चिंताजनक है। नियमों की धज्जियां उड़ाते हुए ठेकेदार अपने मनमाने ढंग से काम कर रहा है ।
अधिकारियों की सफाई— "जगह नहीं थी!"
इस मामले में जब नेशनल हाईवे विभाग के इंजीनियर शर्मा से बात की गई, तो उनका कहना है कि "जहाँ से सड़क निर्माण प्रारंभ हुआ है, वहाँ सूचना बोर्ड लगाने की जगह नहीं थी, इसलिए नहीं लगाया गया। हालांकि, ठेकेदार को अन्यत्र लगाने के निर्देश दिए गए हैं।"
लेकिन सवाल यह उठता है:
क्या संकेतिक बोर्ड लगाने के लिए जगह की जरूरत होती है?
क्या सरकारी नियम केवल कागजों तक सीमित रह गए हैं?
यदि कोई गंभीर हादसा हो जाए, तो क्या इसी तरह की सफाई दी जाएगी?
अधिकारियों की यह गैर-जिम्मेदाराना सोच सरकार की कार्यशैली पर भी सवाल उठाती है।
जनता का आक्रोश, जल्द हो कार्रवाई
स्थानीय नागरिकों में इस लापरवाही को लेकर भारी आक्रोश है। उनका कहना है कि सड़क निर्माण कार्य में पारदर्शिता और सुरक्षा दोनों जरूरी हैं। यदि जल्द ही संकेतिक बोर्ड और सूचना पटल नहीं लगाए गए, तो उग्र प्रदर्शन किया जाएगा।
✔ सरकार को तत्काल इस मामले में दखल देना चाहिए।
✔ ठेकेदार और लापरवाह अधिकारियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई होनी चाहिए।
✔ निर्माण कार्य के सभी मानकों की समीक्षा कर पारदर्शिता सुनिश्चित की जानी चाहिए।
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क्या होगी कार्रवाई? या मामला होगा ठंडे बस्ते में?
अगर समय रहते सरकार और प्रशासन ने कदम नहीं उठाए, तो यह लापरवाही किसी बड़ी दुर्घटना का कारण बन सकती है।
(विशेष रिपोर्ट, NEWS 1947
रतनपुर)
