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शिवनाथ नदी के जल स्तर में बढ़ोतरी, महमरा एनीकट से 8 फीट ऊपर बह रहा पानी, मोगरा जलाशय से आ रहा 10000 क्यूसेक पानी, जान जोखिम में डालकर ग्राम मुड़पार के बच्चे जा रहे स्कूल

शिवनाथ नदी के जल स्तर में बढ़ोतरी, महमरा एनीकट से 8 फीट ऊपर बह रहा पानी, मोगरा जलाशय से आ रहा 10000 क्यूसेक पानी, जान जोखिम में डालकर ग्राम मुड़पार के बच्चे जा रहे स्कूल

दुर्ग 25 जुलाई । दुर्ग जिले में लगातार हो रही बारिश के कारण शिवनाथ नदी का जलस्तर फिर से बढ़ने लगा है आज महमरा एनीकट से 8 फीट ऊपर पानी बह रहा है। मोगरा जिला से फिलहाल 10000 क्यूसेक पानी छोड़ा जा रहा है जल संसाधन विभाग ने वर्षा की स्थिति को देखते हुए और भी अधिक जल छोड़े जाने का अनुमान व्यक्त किया है। वही कुकरी नाल उफान पर होने के कारण धमधा ब्लॉक के ग्राम पंचायत भाठाकोकड़ी के आश्रित ग्राम मुड़पार के बच्चे जान को जोखिम में डालकर स्कूल जा रहे हैं।
जल संसाधन विभाग के कार्यपालन नियंत्रित सुरेश पांडे ने बताया कि शिवनाथ नदी के कैचमेंट ऐरिया में लगातार वर्षा होने से तांदुला नदी, खरखरा नदी व शिवनाथ के अन्य सहायक नालो में जल स्तर फिर बढ़ने लगा है जिससे आज शिवनाथ नदी के महमरा एनीकट के ऊपर 08 फीट पानी बह रहा है। नदी के बढ़ते जल स्तर को देखते हुए सतर्कता की आवश्यकता है। मोंगरा बैराज से 10,000 क्यूसेक पानी छोड़ा जा रहा है। वर्षा की स्थिति को देखते हुए मोंगरा बैराज से और ज्यादा पानी छोड़ा जा सकता है।
अतः शिवनाथ नदी तट के सभी गाँव के लोग सतर्क रहे।


जिले के जिला सहयोग में पानी की आवक बनी हुई है जिसके कारण तांदुला जलाशय में 46%, खरखरा जलाशय 58%, खपरी जलाशय में 74% व गोंदली जलाशय में 27% जल भराव हो चुका है। जिले में ऐसी वर्षा की स्थिति बनी रही तो जलाशय के भराव में और बढ़ोत्तरी होगी।

जान जोखिम में डालकर बच्चे जा रहे हैं स्कूल

 धमधा ब्लॉक के ग्राम पंचायत भांठाकोकड़ी के आश्रित ग्राम मुड़पार में बच्चे जान जोखिम में नाला पार करना पड़ता है। कई बच्चों ने डर की वजह से स्कूल तक जाना बंद कर दिया है।
 मुड़पार गांव के एक तरफ आमनेर नदी और दूसरी तरफ कुकरी नाला है। यहां केवल 5वीं कक्षा तक ही स्कूल है। आगे की पढ़ाई के लिए बच्चों को 2 किलोमीटर दूर पैदल चलकर घोटवानी गांव जाना पड़ता है। बारिश के चलते कुकरी नाला का जल स्तर बढ़ जाता है। जिसे पार कर बच्चे स्कूल जाते हैं।

गांव में रहते हैं 800 लोग

इस गांव में लगभग 800 लोग रहते हैं। बारिश के दिनों में यहां के लोग दैनिक जीवन निर्वाह के लिए आवश्यक वस्तुओं के लिए कई किलोमीटर दूर से घूमकर जाते हैं या फिर नाले के पानी कम होने का इंतजार करते हैं। नाले और नदी का पानी बढ़ने के साथ ही भांठाकोकड़ी गांव सहित जिला-ब्लॉक से आश्रित गांव का संपर्क टूट जाता है।

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