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कृषि महाविद्यालय में मनाया गया विश्व पर्यावरण दिवस

कृषि महाविद्यालय में मनाया गया विश्व पर्यावरण दिवस 
स्थिरता और पर्यावरण प्रबंधन को बढ़ावा देने पर जोर

बिलासपुर - प्रत्येक वर्ष 5 जून का दिन विश्व भर में विश्व पर्यावरण दिवस के रूप में मनाया जाता है। इसके मनाने का उद्देश्य लोगों को पर्यावरण की सुरक्षा के प्रति जागरूक और सचेत करने का है। प्रकृति के बिना मानव के अस्तित्व की कल्पना नहीं की जा सकती है ऐसे में यह बेहद जरूरी है कि हम पेड़-पौधों, जंगलों, नदियों, झीलों, भूमि, पहाड़ सबके महत्व को समझे। उक्त उदगार डॉ. आर.के.एस. तिवारी, अधिष्ठाता, कृषि महाविद्यालय  बिलासपुर ने विश्व पर्यावरण दिवस के अवसर पर आयोजित कार्यक्रम में मुख्य अतिथि की आसंदी से व्यक्त किया। आपने आगे कहा कि पेड़ों की अंधाधुंध कटाई और बढ़ते प्रदूषण के कारण पर्यावरण प्रदूषित होता जा रहा है। वैश्विक तापमान बढ़ रहा है। दूषित हवा लोगों का दम घोट रही है। शहरों में बहुत से लोगों को बदतर आवोहवा के चलते सांस, हृदय, फेफड़ों की बीमारियां हो रही है। हमें यह समझना चाहिए कि संपूर्ण मानवता का अस्तित्व प्रकृति पर निर्भर है। इसलिए एक स्वस्थ एवं सुरक्षित पर्यावरण के बिना मानव समाज की कल्पना अधूरी है। पृथ्वी ग्रह पर ही मानव जीवन संभव है इसलिए इसे जीने लायक बनाए रखना हमारी जिम्मेदारी है।

आयोजन पर प्रकाश डालते हुए वैज्ञानिक एवं कार्यक्रम अधिकारी रासेयो अजीत विलियम्स ने बताया कि इस वर्ष विश्व पर्यावरण दिवस अभियान भूमि पुनर्स्थापना, मरुस्थलीकरण और सूखे से निपटने पर केंद्रित है। इस बार की थीम 'हमारी भूमि, हमारा भविष्य' के रूप में तैयार की गई है। 2024 के विश्व पर्यावरण दिवस वैश्विक समारोह की मेजबानी सऊदी अरब कर रहा है। जो विजन 2030 लक्ष्यों के अनुरूप पर्यावरण की रक्षा और सतत विकास को बढ़ावा देने की अपनी प्रतिबद्धता की पुष्टि करता है। भूमि का कटाव एक वैश्विक समस्या है, जो दुनिया भर में भूमि के विशाल क्षेत्र को प्रभावित करती है, अरबो लोगों को प्रभावित करती है और महत्वपूर्ण पारिस्थितिकी तंत्र को खतरे में डालती है।

कार्यक्रम के विशिष्ट अतिथि डॉ. एन. के. चौरे, प्रमुख वैज्ञानिक (कृषि सांख्यिकी) ने अपने उद्बोधन में कहा कि प्रकृति के बिना मानव जीवन खत्म हो जाएगा, इस बात से भली भांति परिचित होते हुए भी लोग प्रकृति और पर्यावरण को नुकसान पहुंचा रहे हैं। पर्यावरण पर पढ़ने वाले प्रभाव के कारण दुनिया विनाश की ओर जा रही है। मौसम में होता बदलाव इसका एक संकेत है। अत्यधिक बढ़ते तापमान का एक कारण ग्लोबल वार्मिंग है, जो मानव जीवन को बहुत नुकसान पहुंचा सकता है। ऐसे में पर्यावरण के महत्व के बारे में लोगों को जागरूक करके प्रकृति को हो रहे नुकसान को रोका जा सकता है।

कार्यक्रम का शुभारंभ मुख्य अतिथि एवं अन्य अतिथियों को कोचिया के पौधे भेंट कर किया गया। 

विश्व पर्यावरण दिवस के अवसर पर 'कीटनाशकों के सुरक्षित और विवेकपूर्ण उपयोग, विषय पर छात्र-छात्राओं हेतु एकदिवसीय जागरूकता कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कॉर्टेवा एग्रीसाइंस की प्रक्षेत्र वैज्ञानिक डॉ. (सुश्री) शुभश्री प्रियदर्शनी ने विषय पर प्रकाश डालते हुए कहा कि कीटनाशक का उपयोग करने से पहले, प्रश्न पूछे 'क्या कीटनाशक की आवश्यकता है?' कीटनाशक का उपयोग करने से पहले सभी निर्देशों को ध्यान से पढ़े और चेतावनियों से परिचित हो। लेबल आपको उत्पाद के बारे में वह सब कुछ बताता है जो आपको जानना जरूरी है। इसी के अंतर्गत उत्पादन प्रबंध जागरूकता कार्यक्रम शामिल है। जिसका अर्थ है कि जो कोई भी उत्पाद डिजाइन करता है, उत्पादन करता है, बेचता है या उपयोग करता है, वह उत्पादन के जीवन चक्र के सभी चरणों में उत्पाद के पर्यावरणीय प्रभाव को कम करने की जिम्मेदारी लेता है, जिसमें जीवन प्रबंधन का अंत भी शामिल है। कृषि छात्र होने के नाते आप सभी का उत्तरदायित्व है कि अन्नदाता कृषक भाइयों को कीटनाशकों के सुरक्षित उपयोग हेतु जागरूक करें।

आज के कार्यक्रम का सफल संचालन वैज्ञानिक अजीत विलियम्स एवं आभार सहायक प्राध्यापक एवं रासेयो कार्यक्रम अधिकारी अर्चना केरकट्टा ने व्यक्त किया। इस अवसर पर कृषि महाविद्यालय एवं अनुसंधान केंद्र के समस्त प्राध्यापक, वैज्ञानिक, कर्मचारी गण एवं छात्र-छात्राएं बड़ी संख्या में उपस्थित थे।

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