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जीपीएम ज़िले भारत का नया कानून संबंध सेमिनार का किया गया आयोजन

जीपीएम ज़िले भारत का नया कानून संबंध सेमिनार का किया गया आयोजन


छत्तीसगढ़,पेंड्रा। जिले में भारत का नया कानून संबंध सेमिनार का जिला पुलिस के द्वारा आयोजन किया गया था। यह आयोजन पुलिस अधीक्षक श्रीमती भावना गुप्ता, संजीव राय, सुचिता सिंह, अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक ओम चंदेल, श्रीमती निकिता तिवारी, राकेश चतुर्वेदी, इकबाल सिंह, पवन सुल्तानिया, जीवन सिंह राठौर, की उपस्तिथि में जिले के पेंड्रा में स्थित पंडित माधव राव सप्रे प्रेस क्लब पेंड्रा में आयोजित किया गया था।

वहीं ,पुलिस अधीक्षक श्रीमती भावना गुप्ता ने बताया कि नई भारतीय न्याय संहिता-23 में पूर्व प्रचलित धाराओं व सजा प्रावधानों में कई बदलाव हुए हैं। उन्होंने उदाहरण से स्पष्ट किया कि हत्या के अपराध पर दर्ज होने वाली धारा-302 अब नए कानून के अनुसार धारा-103 के रूप में दर्ज होंगे। गैंगरेप पर धारा-376(डी) की जगह अब नई संहिता के तहत धारा-70(1) के तहत अपराध दर्ज होगा। इसी तरह बलात्कार, जो कि भा.द.वि. के तहत धारा-376(3) के तहत दर्ज होता था, वह अब भारतीय न्याय संहिता में धारा-65(1) के तहत अपराध माना जाएगा। चोरी धारा-378 की जगह अब धारा-303(1) के अंतर्गत अपराध माना जाएगा। डकैती पर अब धारा-310(1), लूट पर अब धारा-309 के तहत अपराध दर्ज होगा। धोखाधड़ी पर धारा-420 की जगह अब धारा-318 के तहत जुर्म दर्ज होगा। उन्होंने बताया कि ऐसे कई धाराओं में परिवर्तन कर न्याय प्रणाली में व्यापक सुधार कर अपराधों पर सख्त सजा का प्रावधान जमानत प्रक्रियाओं में सुधार, जांच व न्यायिक प्रक्रिया में पारदर्शिता लाई गई है।

वहीं संजीव राय के द्वारा नए कानून के तहत सजा प्रावधानों व डिजिटल और इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्यों की मान्यता व साक्ष्य संबंधी प्रस्तुतिकरण की प्रक्रिया के सरलीकरण के दिशा में किए गए प्रबंधों की विस्तार से जानकारी दी। साथ ही उन्होंने बताया कि गंभीर प्रकरणों में डिजिटल और इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्यों को नए कानून में मान्यता मिली है। भगोड़े अपराधियों पर कानून और भी सख्त बनाया गया है। इन न्यायसंगत सुधारों से जहां छोटे अपराधों में लिप्त आरोपियों को सुधरने का अवसर दिया गया है, वहीं जघन्य अपराधों पर कड़ी सजा होगी। भारतीय न्याय संहिता में पहली बार कम्युनिटी सर्विस जैसी सजा का प्रावधान कर अपराधियों को सुधरने का अवसर भी दिए जाने का प्रावधान है। न्याय संहिता में ई-एफ.आई.आर. का प्रावधान है, जिसमें तीन दिवस की निर्धारित अवधि के भीतर प्रार्थी को संबंधित थाने पर पहुंचकर अपनी पहचान, हस्ताक्षर सत्यापित कराना होगा।

वहीं डीएसपी श्रीमती निकिता तिवारी ने बताया कि संशोधित नियमों व संहिता का गहन अध्ययन कर न्याय स्थापित करने व अपराधों की रोकथाम व पीड़ितों की मदद के लिए कदम उठाएं। साथ ही उन्होंने कहा कि न्याय संहिता की जानकारी देने नियमित कार्यशाला का आयोजन किया जाएगा। ताकि लोगों को जागरूक किया जा सके।। साथ ही सभी ने एक जुलाई 2024 से भारत में लागू होने वाले नए कानून ''भारत न्याय संहिता'' के संदर्भ में विषय विशेषज्ञों के द्वारा नए कानून की बारीकियों के संदर्भ में विस्तार से चर्चा और जानकारी दी गई थी। वहीं इस सेमिनार में उपस्थित लोगों ने अपने अपने प्रश्न भी पूछा गया था। वहीं पुलिस अधीक्षक श्रीमती भावना गुप्ता, संजीव राय, सुचिता सिंह, अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक ओम चंदेल, श्रीमती निकिता तिवारी,  रामनिवास तिवारी, राकेश चतुर्वेदी, इकबाल सिंह, पवन सुल्तानिया, जीवन सिंह राठौर, पंकज तिवारी, ओम प्रकाश बंका, रमेश साहू, मदन सोनी, जनार्दन श्रीवास, शादिक खान, मैकू भरिया, गणेश जायसवाल, पारस चौधरी, आकाश राय, थाना प्रभारी नवीन बोरकर, धर्मानन्द शुक्ला,  सहित बड़ी संख्या में प्रिंट मीडिया एवम इलेक्ट्रानिक मीडिया के साथ ही आम जन उपस्थित रहे।

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