नई दिल्ली। भारत दौरे पर आए रूसी राष्ट्रपति व्लादिमिर पुतिन और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने लगभग 24 घंटे के भीतर तीन बार मुलाकात कर भारत-रूस संबंधों में नई ऊर्जा भर दी। दोनों नेताओं ने प्राइवेट डिनर, द्विपक्षीय बैठक, ज्वॉइंट प्रेस कॉन्फ्रेंस और इंडिया-रूस बिजनेस फोरम को संबोधित कर साझेदारी को नई दिशा देने का संदेश दिया।
हालांकि इस दौरान किसी बड़े सैन्य सौदे (डिफेंस डील) का ऐलान नहीं हुआ। पहले ऐसी उम्मीद जताई जा रही थी कि लड़ाकू विमान या किसी अन्य प्रमुख रक्षा समझौते की घोषणा हो सकती है, लेकिन चर्चा केवल गैर-रक्षा क्षेत्रों में सहयोग को आगे बढ़ाने पर केंद्रित रही।
भारत-रूस के बीच 19 समझौतों पर हस्ताक्षर
दोनों देशों ने कुल 19 समझौते और MoU साइन किए, जिनका मुख्य उद्देश्य द्विपक्षीय व्यापार और रणनीतिक सहयोग बढ़ाना है। प्रमुख समझौते इस प्रकार हैं—
शिप बिल्डिंग में सहयोग
भारतीय नाविकों को पोलर (बर्फीले) समुद्री रास्तों में जहाज चलाने की ट्रेनिंग
नई शिपिंग लेन पर संयुक्त निवेश
सिविल न्यूक्लियर ऊर्जा में सहयोग
क्रिटिकल मिनरल्स (महत्वपूर्ण खनिजों) के क्षेत्र में समझौते
व्यापार, ऊर्जा, ट्रांसपोर्ट और रिसर्च से जुड़े अन्य करार
इन समझौतों को भारत-रूस व्यापार और आर्थिक साझेदारी को अगले स्तर पर ले जाने वाला कदम माना जा रहा है।
मोदी ने रूस को बताया भारत का “सबसे करीबी सहयोगी”
संयुक्त प्रेस कॉन्फ्रेंस में प्रधानमंत्री मोदी ने रूस को भारत का सबसे करीबी और भरोसेमंद सहयोगी बताया। उन्होंने कहा—
“भारत और रूस के बीच दोस्ती ध्रुव तारे की तरह स्थिर और अटल है।”
मोदी ने यह भी कहा कि भारत-रूस संबंध समय की कसौटी पर खरे उतरे हैं और दोनों देशों के हित भविष्य में और गहरे होंगे।

