डोंगरगढ़। मोस्ट वांटेड नक्सली कमांडर माडवी हिडमा के मारे जाने के अगले ही दिन डोंगरगढ़ और बालाघाट के घने जंगलों में नक्सलियों और सुरक्षा बलों के बीच जोरदार मुठभेड़ हुई। यह मुठभेड़ मध्यप्रदेश–छत्तीसगढ़–महाराष्ट्र की संयुक्त टीम और नक्सलियों के बीच चली, जिसमें मध्यप्रदेश हॉकफोर्स के बहादुर निरीक्षक आशीष शर्मा शहीद हो गए।
हिडमा के खात्मे से नक्सली संगठन में बड़ी हलचल मची थी। सुरक्षा एजेंसियों का मानना है कि नक्सली अक्सर ऐसे समय में सीमावर्ती इलाकों में अचानक हमले कर अपनी मौजूदगी और शक्ति का संदेश देते हैं। डोंगरगढ़–बालाघाट का जंगल नक्सलियों का पुराना फॉलबैक जोन रहा है, जहां वे दबाव बढ़ने पर regroup होकर सुरक्षा बलों को निशाना बनाते हैं।
इस ताजा हमले ने सवाल खड़ा किया है कि क्या यह महज संयोग था या हिडमा की मौत के बाद नक्सलियों की प्रतिशोधी कार्रवाई। फिलहाल इलाके में सर्च ऑपरेशन तेज कर दिया गया है

