नई दिल्ली। भोजन केवल पेट की भूख मिटाने का साधन नहीं है, बल्कि इसे देवी अन्नपूर्णा का रूप माना गया है और घर में भोजन को समृद्धि का प्रतीक और देवी लक्ष्मी का रूप माना जाता है। वास्तु शास्त्र में घर में भोजन बनाने के कई नियम बताए गए हैं। इन नियमों के अनुसार भोजन बनाते समय घर का वातावरण शुद्ध और पवित्र होना चाहिए, तभी भोजन शुभ फल देता है।
हालांकि, कुछ विशेष तिथियों पर घर में रोटी बनाने से मना किया गया है। इन दिनों रोटी बनाने से घर में अशांति और समृद्धि में कमी आ सकती है।
1. शीतला अष्टमी
शीतला अष्टमी को बहुत पावन और महत्वपूर्ण माना जाता है। इसे बसौड़ा भी कहा जाता है। इस दिन माता शीतला को ठंडे या बासी भोजन का भोग लगाया जाता है।
मान्यता है कि इस दिन चूल्हा नहीं जलाना चाहिए, इसलिए घर में रोटी या अन्य भोजन बनाना वर्जित है।
इस दिन माता को चढ़ाया गया बासी भोग ही परिवार के साथ खाया जाता है।
2. दिवाली
दिवाली हिंदू धर्म का सबसे शुभ और महत्वपूर्ण त्योहार माना जाता है।
मान्यता है कि दिवाली के दिन हर घर में माता लक्ष्मी का आगमन होता है।
इस दिन रोटी बनाने की बजाय लोग खीर, पोड़ी, मालपुए और अन्य विशेष पकवान बनाते हैं।
ऐसा माना जाता है कि रोटी बनाना माता लक्ष्मी को अप्रसन्न कर सकता है, इसलिए विशेष व्यंजन बनाकर मां से कृपा और समृद्धि की कामना की जाती है।
विशेष जानकारी
वास्तु शास्त्र में इन दिनों के अलावा भी कुछ अन्य अवसरों और तिथियों पर घर में रोटी बनाने की मनाही बताई गई है। इससे घर में शांति, समृद्धि और सकारात्मक ऊर्जा बनी रहती है।
घर में भोजन बनाते समय इन धार्मिक और वास्तु नियमों का पालन करना शुभ माना जाता है।

