नई दिल्ली। मध्य प्रदेश सरकार ने बिजली उपभोग के लिए नई व्यवस्था लागू की है। अब प्रदेश के सभी शासकीय कार्यालयों, मंत्रियों के बंगले और सरकारी भवनों में प्रीपेड स्मार्ट मीटर लगाए जा रहे हैं। यानी अब बिजली तभी मिलेगी जब अग्रिम भुगतान कर ‘रिचार्ज’ किया जाएगा। यह व्यवस्था भारत सरकार के विद्युत मंत्रालय के दिशा-निर्देशों के तहत की जा रही है।
आरडीएसएस योजना के तहत शुरू हुआ काम
प्रदेश की विद्युत वितरण कंपनियों ने केंद्र सरकार की पुनर्गठित वितरण क्षेत्र योजना (RDSS) के अंतर्गत यह कार्य प्रारंभ किया है। इस योजना का उद्देश्य पारदर्शी बिलिंग, सटीक मीटर रीडिंग और ऊर्जा लेखांकन में सुधार लाना है।
वल्लभ भवन से लेकर तहसील कार्यालयों तक लगाए जाएंगे स्मार्ट मीटर
अब वल्लभ भवन मंत्रालय, सतपुड़ा भवन, विंध्याचल भवन सहित तहसील स्तरीय सरकारी दफ्तरों में भी स्मार्ट मीटर लगाए जाएंगे।
प्रदेश में अब तक 45,191 सरकारी कार्यालयों में स्मार्ट मीटर लगाए जा चुके हैं, जिनमें से 18,177 कनेक्शनों पर प्रीपेड बिलिंग सुविधा शुरू कर दी गई है।
15 हजार करोड़ की योजना, 55 लाख मीटर लगेंगे
मध्य प्रदेश में कुल 55 लाख स्मार्ट मीटर लगाने का लक्ष्य रखा गया है, जिसमें घरेलू उपभोक्ता भी शामिल हैं। प्रत्येक स्मार्ट मीटर की लागत लगभग 10 हजार रुपये है। इस पूरे कार्य पर करीब 15 हजार करोड़ रुपये खर्च किए जाएंगे।
इन मीटरों से बिजली लेने के लिए मोबाइल की तरह पहले रिचार्ज करना अनिवार्य होगा।
निकायों और पंचायतों पर 1300 करोड़ का बिजली बिल बकाया
प्रदेश में कुल 413 नगर निकाय हैं, जिनमें से कई निकायों पर 6 माह से लेकर एक साल तक के बिजली बिल बकाया हैं।
वहीं, नगर निकायों, पंचायतों और सरकारी विभागों पर मिलाकर कुल 1300 करोड़ रुपये का बिल बकाया है।
नगरीय विकास, महिला एवं बाल विकास, और पंचायत विभागों पर अकेले 800 करोड़ रुपये का बकाया है।

