शिक्षा व्यवस्था पर संकट: 10600 स्कूल बंद, 35000 शिक्षक प्रभावित – काउंसलिंग प्रक्रिया में भारी अनियमितता का आरोप
बिलासपुर, 6 जून 2025:
शासन द्वारा शालाओं और शिक्षकों के युक्तियुक्तकरण (Rationalization) के नाम पर प्रदेशभर में लगभग 10600 स्कूलों को बंद करने का निर्णय लिया गया है, जिससे करीब 35000 शिक्षक प्रत्यक्ष रूप से प्रभावित हो रहे हैं। इस आदेश के परिपालन में 4 जून 2025 को बिलासपुर जिले में 461 शिक्षकों की काउंसलिंग प्रक्रिया संपन्न कराई गई।
हालांकि, इस प्रक्रिया को लेकर शिक्षकों में भारी आक्रोश और रोष व्याप्त है। शिक्षकों और शिक्षक संघों ने आरोप लगाया है कि काउंसलिंग में भारी मनमानी और भ्रष्टाचार सामने आया है। वरिष्ठ शिक्षकों को जानबूझकर कनिष्ठ दिखाकर अतिशेष सूची में डाल दिया गया, जबकि अधिकारियों के करीबी शिक्षकों को बचाने के लिए जानबूझकर फर्जी अंक या विषय परिवर्तन किया गया है।
शिक्षक संघों का कहना है कि विज्ञान विषय के शिक्षकों को 'हिन्दी विषय' दिखाकर उन्हें अतिशेष घोषित कर दिया गया। यही नहीं, शासन द्वारा निर्धारित गाइडलाइन का भी पालन नहीं किया गया, और शिक्षकों को दावा-आपत्ति दर्ज कराने का अवसर तक नहीं दिया गया।
शिक्षक संगठनों ने आरोप लगाया है कि यह पूरी प्रक्रिया राजनीतिक दबाव में भाजपा सरकार को खुश करने के लिए बेहद जल्दबाज़ी में पूरी कराई गई। इसके विरोध में सैकड़ों शिक्षकों और संगठनों ने छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट, बिलासपुर में याचिका दाखिल करने की तैयारी कर ली है।
शिक्षकों का कहना है कि यह समस्या केवल काउंसलिंग तक सीमित नहीं है। उनका आरोप है कि शासन ने सत्र 2008 के सेट-अप को खारिज कर नया सेटअप लागू कर दिया है, जिससे हजारों स्कूल बंद हो रहे हैं और बड़ी संख्या में शिक्षक बेरोजगारी या स्थानांतरण के संकट में फंसे हैं।
शिक्षकों का यह भी आरोप है कि सरकार एक तरफ़ शिक्षा के नाम पर स्कूल बंद कर रही है, और दूसरी तरफ़ नई शराब दुकानों को खोला जा रहा है, जो सरकार की प्राथमिकताओं पर गंभीर सवाल खड़े करता है।
अब शिक्षक और संघों की मांग है:
काउंसलिंग प्रक्रिया में हुई अनियमितताओं की न्यायिक जांच हो।
दोषी अधिकारियों पर कड़ी कार्यवाही की जाए।
अतिशेष घोषित किए गए शिक्षकों की समीक्षा हो।
दावा-आपत्ति की पूरी प्रक्रिया पुनः शुरू की जाए।
