भुई आंवला: चमत्कारी औषधीय जड़ी-बूटी, प्राकृतिक चिकित्सा में लाभकारी
यकृत, पथरी, मधुमेह और पाचन समस्याओं में कारगर – वैज्ञानिक अजीत विलियम्स
बिलासपुर, 11 अप्रैल।
भुई आंवला (फिलैंथस निरूरी), जिसे पथरीभंजन या चांका पिएद्रा के नाम से भी जाना जाता है, एक प्रभावशाली औषधीय वनस्पति है जो यकृत, गुर्दा, पाचन और मधुमेह जैसी समस्याओं के उपचार में कारगर मानी जाती है। यह जानकारी बीटीसी कॉलेज ऑफ एग्रीकल्चर एंड रिसर्च स्टेशन, बिलासपुर के वैज्ञानिक अजीत विलियम्स ने साझा की।
विलियम्स के अनुसार, यह वनस्पति उष्णकटिबंधीय क्षेत्रों में प्राकृतिक रूप से पाई जाती है और इसकी पत्तियाँ, फूल एवं फल अनेक औषधीय गुणों से भरपूर होते हैं। इसमें फायलैन्थिन, हाइपोफायलैन्थिन जैसे एल्कलॉइड, क्वेरसेटिन जैसे फ्लावोनॉइड्स, लिग्नान, टैनिन और सैपोनिन जैसे जैव-सक्रिय घटक पाए जाते हैं।
औषधीय गुणों की चर्चा करते हुए उन्होंने बताया कि –
- यह यकृत को विषमुक्त करने और पुनर्जीवित करने में सहायक है।
- गुर्दे व पित्त की पथरी को घोलने में सहायक होने के कारण इसे ‘स्टोन ब्रेकर’ भी कहा जाता है।
- इसमें विषाणुरोधी गुण होते हैं, विशेष रूप से हेपेटाइटिस-बी के विरुद्ध।
- मधुमेह रोगियों के लिए भी यह लाभकारी है, क्योंकि यह रक्त शर्करा नियंत्रित करने में मदद करता है।
- पाचन तंत्र को सुधारता है, कब्ज व अपच में राहत देता है।
- इसमें मौजूद प्रतिऑक्सीकारक तत्व सूजन और ऑक्सीडेटिव तनाव को कम करने में सहायक होते हैं।
उपयोग विधियों के बारे में जानकारी देते हुए उन्होंने बताया कि इसे रस, चूर्ण, काढ़ा, कैप्सूल और गोली के रूप में उपयोग किया जा सकता है।
विलियम्स ने यह भी स्पष्ट किया कि वैज्ञानिक शोधों और नैदानिक परीक्षणों से भुई आंवला के औषधीय गुण प्रमाणित हो चुके हैं। भारतीय और अंतरराष्ट्रीय वैज्ञानिक पत्रिकाओं में इसके सकारात्मक प्रभावों का उल्लेख किया गया है।
अंत में उन्होंने आमजन से अपील की कि किसी भी औषधीय पौधे का उपयोग चिकित्सकीय परामर्श से ही करें, विशेषकर जब व्यक्ति किसी पुरानी बीमारी से पीड़ित हो या अन्य दवाइयाँ ले रहा हो।
