महामाया कुंड में 23 कछुओं की मौत: प्रशासन की चुप्पी से उठे सवाल
रतनपुर। छत्तीसगढ़ के ऐतिहासिक रतनपुर स्थित महामाया मंदिर परिसर के कुंड में 23 कछुओं की संदिग्ध परिस्थितियों में मौत हो गई। यह घटना वन्यजीव प्रेमियों और स्थानीय नागरिकों के लिए गहरी चिंता का विषय बन गई है। पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट में दम घुटने से मौत की पुष्टि हुई है, लेकिन प्रशासन की ढिलाई पर गंभीर सवाल उठ रहे हैं। वन्यजीव संरक्षण अधिनियम के तहत यह अपराध दंडनीय है, फिर भी अब तक दोषियों पर कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई है।
घटना कैसे सामने आई?
रतनपुर महामाया मंदिर परिसर स्थित कुंड में बड़ी संख्या में मृत कछुए मिलने के बाद स्थानीय लोगों में हड़कंप मच गया। बताया जा रहा है कि मंदिर ट्रस्ट से जुड़े कुछ जिम्मेदार लोगों ने इस घटना को दबाने की कोशिश की। बिना किसी जांच अधिकारी की अनुमति के मंदिर कर्मचारियों को फोन पर आदेश देकर कछुओं के शव मंदिर परिसर से बाहर फिंकवा दिए गए।
जब यह खबर नगर में फैली, तो प्रशासन ने आनन-फानन में जांच शुरू की और सीसीटीवी फुटेज खंगाले। फुटेज में चार संदिग्ध व्यक्ति देखे गए, लेकिन अब तक कोई गिरफ्तारी नहीं हुई है।
कानूनी पहलू: अपराधियों पर क्या कार्रवाई हो सकती है?
भारत में कछुए वन्यजीव संरक्षण अधिनियम, 1972 के तहत संरक्षित जीवों की श्रेणी में आते हैं। इस अधिनियम की धारा 9 के तहत कछुओं को नुकसान पहुंचाना गैर-कानूनी है, और धारा 51 के तहत दोषियों को 3 से 7 साल की सजा और जुर्माने का प्रावधान है। इसके बावजूद प्रशासन की ओर से अब तक कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया है।
प्रशासन की सुस्ती पर उठते सवाल
स्थानीय लोगों का कहना है कि प्रशासन इस गंभीर अपराध में ‘कछुए की चाल’ चल रहा है। इतने बड़े स्तर पर हुई वन्यजीव हानि के बावजूद अभी तक किसी को गिरफ्तार नहीं किया गया है।
पर्यावरणविदों की चेतावनी
वन्यजीव कार्यकर्ता और पर्यावरणविद इस मामले को लेकर आक्रोशित हैं। उनका कहना है कि यदि इस मामले में प्रशासन ने लापरवाही बरती, तो यह भविष्य में अन्य वन्यजीवों के लिए भी खतरा बन सकता है। उन्होंने मांग की है कि दोषियों पर वन्यजीव संरक्षण अधिनियम के तहत सख्त कार्रवाई की जाए।
अब आगे क्या?
सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि इस मामले की जांच कर रहे अधिकारी का तबादला कर दिया गया है, जिससे साफ है कि प्रशासन कार्रवाई करने के बजाय मामले को ठंडे बस्ते में डालने की कोशिश कर रहा है।
अब बड़ा सवाल यह है कि क्या दोषियों को जल्द सजा मिलेगी या यह मामला भी अन्य मामलों की तरह फाइलों में दबकर रह जाएगा? प्रशासन की निष्क्रियता से नाराज स्थानीय लोग अब उच्च अधिकारियों और सरकार से न्याय की गुहार लगा रहे हैं।
