गौरेला-पेंड्रा-मरवाही जिले के मगुर्दा गांव में पारंपरिक श्रद्धा और उत्साह के साथ बिदरी त्योहार मनाया गया। इस अवसर पर गांव के लोग अपने प्राचीन देवस्थान पर एकत्र हुए और विधि-विधान से पूजा-अर्चना की। इसके बाद सांकेतिक रूप से जुताई कर धान की बुवाई की रस्म निभाई गई।
गांव के बुजुर्गों और किसानों का मानना है कि इस देवस्थान पर पूजा करने और धान की प्रतीकात्मक बुवाई करने के बाद अब किसी भी समय बुवाई शुरू की जा सकती है। यह परंपरा वर्षों से चली आ रही है और इसे गांव के लोग अच्छे फसल उत्पादन की कामना के रूप में मनाते हैं।
त्योहार के दौरान ग्रामीणों ने पारंपरिक रीति-रिवाजों का पालन करते हुए सामूहिक रूप से भगवान से अच्छी वर्षा और उपजाऊ फसल की प्रार्थना की। इस धार्मिक और सांस्कृतिक आयोजन में बड़ी संख्या में गांव के लोग शामिल हुए और पारंपरिक लोक गीतों और नृत्यों के साथ उत्सव का आनंद लिया।
गांव के प्रमुख लोगों ने बताया कि यह त्योहार न केवल कृषि कार्यों की शुरुआत का प्रतीक है, बल्कि गांव के लोगों के आपसी भाईचारे और सांस्कृतिक एकता को भी मजबूत करता है।
