महुआ फूल बना आदिवासियों की आजीविका का सहारा, 30 से 35 हजार तक कमा रहे ग्रामीण
गौरेला-पेंड्रा-मरवाही – वनों से घिरे गौरेला-पेंड्रा-मरवाही जिले में इन दिनों महुआ फूलों की बहार आई हुई है। यह फूल यहां के आदिवासियों के लिए न केवल पारंपरिक महत्व रखता है, बल्कि उनकी आजीविका का एक प्रमुख साधन भी बना हुआ है। स्थानीय निवासियों का कहना है कि महुआ संग्रहण से उन्हें हर सीजन में अच्छी आमदनी हो जाती है।
स्थानीय निवासी श्री बुद्धू सिंह ने बताया कि वे महुआ फूल इकट्ठा करके सालाना 30,000 से 35,000 रुपए तक का मुनाफा कमा लेते हैं। यह फूल सुखाकर और बाजार में बेचकर अच्छी आय अर्जित की जा सकती है।
महुआ से आर्थिक सशक्तिकरण
महुआ फूल का उपयोग विभिन्न तरीकों से किया जाता है। इसे सुखाकर मिठाइयों, दवाइयों और पारंपरिक पेय पदार्थों में इस्तेमाल किया जाता है। बाजार में इसकी बढ़ती मांग के चलते आदिवासी समुदाय को इसका अच्छा मूल्य मिल रहा है।
सरकारी सहयोग की आवश्यकता
हालांकि, स्थानीय निवासियों का कहना है कि यदि सरकार महुआ संग्रहण और विपणन को प्रोत्साहित करे, तो इससे उनकी आमदनी और बढ़ सकती है। उचित समर्थन मिलने पर यह क्षेत्र आदिवासी परिवारों की आर्थिक स्थिति को और मजबूत कर सकता है।
बाजार में बढ़ रही मांग
गौरेला-पेंड्रा-मरवाही में महुआ फूलों की कीमत हर साल बढ़ रही है, जिससे यह ग्रामीणों के लिए एक स्थायी आय का स्रोत बनता जा रहा है। अब देखना होगा कि प्रशासन इस क्षेत्र में क्या पहल करता है ताकि स्थानीय समुदाय को अधिक लाभ मिल सके।
(रिपोर्ट: बुद्धू सिंह श्याम, विशेष संवाददाता, गौरेला-पेंड्रा-मरवाही)
