पेंड्रा। जीवन किसी का भी हो वो बहुत ही अनमोल है और उससे भी ज्यादा जीवन को बचाने वाला डॉक्टर है। इसलिए डॉक्टर को धरती की भगवान की उपाधि डॉक्टरो को दी गई है। पर ऐसे में अगर कोई झोलाछाप डॉक्टर किसी के जीवन को बचाने का जिम्मा 1300 रुपए में सौदा करके उठा ले और पैसा लेने के बाद भी जीवन ना बचा पाए तो वह डॉक्टर नहीं है। जी हां कुछ ऐसा ही मामला जिले में सामने आया है इस आदिवासी बाहुल्य जिले में जहां पर एक झोलाछाप डॉक्टर के गलत इलाज से बच्ची की मौत हो गई है। फिलहाल बच्ची की मौत के बाद शव का पोस्टमार्टम कार्यवाही कर शव को परिजनों को सौप दिया गया है। दरअसल यह पूरा मामला जिले के मरवाही विकासखंड का है जहां पर मरवाही के चिचगोहना के बहरीझोरखी गांव में रहने वाली उमा उरैती जो कक्षा आठवी की छात्रा थी पिछले कुछ दिनों से उसकी तबियत खराब चल रही थी परिजन जो कम पढ़े लिखे थे कुछ समझ पाते तो कही से उन्हें निमधा गांव में रहने वाले शासकीय शिक्षक प्रदीप जायसवाल जो गांव के ही शासकीय बालक प्राथमिक शाला में पदस्थ है साथ ही झोलाछाप डॉक्टर का भी घूम घूमकर इलाज करता है वहां पर पहुँचे शिक्षक डॉक्टर ने बच्ची के परिजनों से बच्ची को स्वास्थ्य करने के एवज में 1300 रुपये में सौदा किया गया और उसके बाद बच्ची का इलाज शुरू कर दिया गया बच्ची की सेहत में सुधार न होकर और बिगड़ने लगी। जिसके बाद बच्ची की तबीयत ज्यादा बिगड़ने पर परिवार वालों के द्वारा बच्ची को शिक्षक झोलाछाप डॉक्टर के क्लिनिक से मरवाही के सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में लाया गया। इसके बाद बच्ची की इलाज के दौरान सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में मौत हो गई थी। मामले में परिजनों के द्वारा झोलाछाप डॉक्टर प्रदीप जायसवाल निवासी निमधा पर आरोप लगाया है कि झोलाछाप डॉक्टर के द्वारा तेरह सौ रुपए में पूरी तरह से ठीक करने का इलाज करने ठेका लिया गया था। लेकिन झोलाछाप डॉक्टर के द्वारा सही इलाज ना करके बच्ची को मरवाही के अस्पताल भेज दिया गया था। जहां बच्ची की मौत हो गई थी।। वहीं स्थानीय लोगों से मिली जानकारी के अनुसार लोगों ने बताया कि कई शासकीय शिक्षक जो झोलाछाप डॉक्टर है के द्वारा इलाज किया गया था जहां कई लोगों की मौतें हो चुकी है पर इस तरह के मामले उजागर नहीं होते थे। लेकिन अब बच्ची की मौत के बाद मामला उजागर हुआ है। इससे पहले पूर्व एसडीएम भीम सिंह के द्वारा प्रदीप जायसवाल के द्वारा स्कूल समय पर अपने निजी क्लिनिक में अवैध तरीके से मरीजों का इलाज करने के मामले में क्लिनिक सील करते हुए उन्हें सस्पेंड भी किया गया था पर समय के साथ वो फिर से अपनी झोलाछाप डॉक्टर का काम शुरू कर दिया।।वही शिक्षा विभाग के अधिकारियो से मिलीभगत कर गाव के ही स्कूल में अपनी पदस्थापना करवा लिया ताकि शिक्षिकीय कार्य की आड़ मके झोलाछाप डॉक्टरी का काम भी करते रहे।
1. डॉ हर्षवर्धन बीएमओ मरवाही।।
वहीं मरवाही बीएमओ डॉक्टर हर्षवर्धन से चर्चा की गई तो उन्होंने बताया कि झोला छाप डॉक्टर से इलाज कराके यहां मरवाही के अस्पताल में शाम को आई थी। जिसमे बच्ची के पूरे शरीर में साढे तीन खून की कमी थी। वहीं हमने सैंपल के लिए भेजे थे। साथ ही हमने बच्ची का इलाज किया था। जहां खून की कमी के कारण यहां उसकी इलाज के दौरान उसकी मौत हो गई थी। साथ ही बच्ची का इलाज निमधा मे तीन-चार दिनों से झोला छाप डॉक्टर के पास इलाज चल रहा था वहीं झोलाछाप डॉक्टर के द्वारा पैसा लेकर ठेके में इलाज कर रहा था।।
2. दिनेश पटेल बीईओ मरवाही।।
वही ब्लॉक शिक्षा अधिकारी दिनेश पटेल से चर्चा की गई तो उन्होंने बताया कि प्रदीप जायसवाल निमधा के शासकीय बालक प्राथमिक शाला में पदस्थ है। वही उनसे इलाज के विषय पर चर्चा की गई तो उन्होंने बताया कि आपके माध्यम से हमें इसकी जानकारी मिल रही है। अगर ऐसा है तो हम इस पर जांच करवाएंगे और जांच के दौरान जो पाया जाएगा उस पर कार्यवाही की जाएगी।।
3. ओम चंदेल अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक।।
वही मामले में अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक ओम चंदेल से चर्चा करने पर उन्होंने बताया कि मामला मरवाही थाना क्षेत्र का है जहां पर सामुदायिक स्वास्थ्य मरवाही में बच्ची का इलाज चल रहा था जहां बच्ची का इलाज के दौरान उसकी मृत्यु हो गई थी। वहीं उन्होंने बताया कि परिजनों ने आरोप लगाया है की निंदा ग्राम में रहने वाले शिक्षक हैं जो कि उसका इलाज कर रहे थे जिसके कारण उसकी मौत हुई है वही हमें पता चला है कि शिक्षक का कार्य करता है और वह गांव में प्राइवेट क्लीनिक चलाते हैं हम इसकी जांच कर रहे हैं उनके पास चलने का लाइसेंस है कि नहीं इसकी जांच कर रहे हैं तथा इस पर मर्ग कायम किया गया है। उसके बाद आगे की कार्यवाही करेंगे।।
4. श्रीमती लीना कमलेश मांडवी जिला कलेक्टर।।
वहीं जिले की कलेक्टर श्रीमती लीना कमलेश मांडवी से चर्चा करने पर उन्होंने बताया कि मामले में जांच की जा रही है। जांच के बाद इस मामले में विधिवत रूप से कार्यवाही की जायेगी।।
