खजुरी नवागांव में सरकारी जमीन पर अवैध मुरुम-पत्थर उत्खनन का आरोप, 20 से 30 फीट गहरे गड्ढों से हादसे का खतरा
तखतपुर। शहर से महज 15 किलोमीटर दूर सकरी थाना क्षेत्र के खजुरी नवागांव में गौठान के पीछे शासकीय भूमि खसरा नंबर 823/1 पर बड़े पैमाने पर मुरुम और चिल्फी पत्थर के कथित अवैध उत्खनन का मामला सामने आया है। ग्राउंड जीरो पर मौजूद तस्वीरों में जमीन के कई हिस्सों में 20 से 30 फीट तक गहरे गड्ढे दिखाई दे रहे हैं। इससे क्षेत्र में हादसे की आशंका भी बढ़ गई है।
ग्रामीणों के मुताबिक, पिछले कई महीनों से रात के समय मशीनों और हाइवा की मदद से मुरुम और पत्थर की खुदाई की जा रही थी। खुदाई के बाद निकाले गए खनिज को वाहनों में भरकर दूसरे स्थानों पर भेजे जाने की भी बात ग्रामीणों ने कही है। हालांकि, इन दावों की आधिकारिक पुष्टि जांच के बाद ही हो सकेगी।
सरकारी जमीन पर उत्खनन से उठे सवाल
जिस स्थान पर खुदाई के निशान मिले हैं, उसके राजस्व एवं वन भूमि से जुड़े होने की जानकारी सामने आ रही है। ऐसे में यदि बिना अनुमति सरकारी जमीन से खनिज का उत्खनन किया गया है, तो शासन को राजस्व नुकसान के साथ भूमि के स्वरूप और पर्यावरण पर भी प्रतिकूल प्रभाव पड़ने की आशंका है।
सबसे बड़ा सवाल यह है कि शहर के इतने नजदीक भारी मशीनों से कथित तौर पर लंबे समय तक उत्खनन चलता रहा, फिर भी संबंधित विभागों की निगरानी व्यवस्था को इसकी जानकारी क्यों नहीं हुई।
रात में मशीनों और हाइवा की आवाजाही का दावा
ग्रामीणों का कहना है कि रात के समय मशीनों की आवाज और हाइवा वाहनों की आवाजाही क्षेत्र में आम हो गई थी। इसके बावजूद कार्रवाई नहीं होने से अब मामले में संरक्षण के आरोप भी लगाए जा रहे हैं। हालांकि, इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि अभी नहीं हुई है और इसकी वास्तविकता जांच के बाद ही स्पष्ट हो सकेगी।
कलेक्टर के संज्ञान में मामला
मामले की जानकारी कलेक्टर संजय अग्रवाल तक पहुंचने के बाद उनके द्वारा इसे संज्ञान में लेते हुए माइनिंग डायरेक्टर को जांच के निर्देश दिए जाने की बात सामने आई है। अब जांच में यह स्पष्ट होना महत्वपूर्ण होगा कि खसरा नंबर 823/1 पर किसकी अनुमति से खुदाई की गई, कितनी मात्रा में मुरुम और पत्थर निकाला गया, खनिज का परिवहन कहां किया गया और यदि उत्खनन अनधिकृत पाया जाता है तो शासन को कितने राजस्व की क्षति हुई।
खजुरी नवागांव में जमीन पर बने विशाल गड्ढे अब केवल कथित अवैध उत्खनन का मुद्दा नहीं रह गए हैं, बल्कि वे सरकारी भूमि की निगरानी और संबंधित विभागों की कार्यप्रणाली पर भी सवाल खड़े कर रहे हैं। जांच पूरी होने के बाद ही मामले की पूरी तस्वीर सामने आएगी।
