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विदेश नीति भारत की होती है, किसी दल की नहीं: शशि थरूर, पाकिस्तान की बदली सैन्य रणनीति भारत के लिए गंभीर चुनौती

 




नई दिल्ली। कांग्रेस सांसद शशि थरूर ने शुक्रवार को स्पष्ट शब्दों में कहा कि विदेश नीति भाजपा या कांग्रेस की नहीं, बल्कि भारत की होती है। उन्होंने कहा कि राजनीति में यदि कोई प्रधानमंत्री की हार पर खुश होता है, तो वह दरअसल भारत की हार की खुशी मना रहा होता है। पंडित जवाहरलाल नेहरू के शब्दों को याद करते हुए थरूर ने कहा— “अगर भारत मर गया, तो कौन जिएगा?”

इंडिया टुडे से बातचीत के दौरान शशि थरूर ने भारत की सुरक्षा चुनौतियों, पाकिस्तान की बदली सैन्य नीति और पड़ोसी देशों की अस्थिरता पर विस्तार से चर्चा की। उन्होंने चेतावनी दी कि भारत को पाकिस्तान से आने वाले सुरक्षा खतरों को कभी भी हल्के में नहीं लेना चाहिए।

पाकिस्तान की बदली सैन्य रणनीति पर चिंता

थरूर ने कहा कि पाकिस्तान अपनी सैन्य रणनीति में बदलाव कर रहा है। पहले ड्रोन, रॉकेट और मिसाइल हमलों पर निर्भर रहा पाकिस्तान अब हाइपरसोनिक मिसाइल तकनीक और छिपकर हमला करने की नीति पर जोर दे रहा है। उन्होंने कहा कि यह ऐसी रणनीति है, जिसे भारत नजरअंदाज नहीं कर सकता।

सेना के हाथ में सत्ता, कमजोर अर्थव्यवस्था

पाकिस्तान की आंतरिक स्थिति को लेकर थरूर ने उसे एक “बेहद समस्याग्रस्त देश” बताया। उन्होंने कहा कि वहां नाम मात्र की नागरिक सरकार है, जबकि असली ताकत सेना के हाथों में है। नीति निर्धारण में सेना का वर्चस्व है और उसी के अनुरूप फैसले लिए जाते हैं।

शशि थरूर की 7 बड़ी बातें

  1. पाकिस्तान की जीडीपी ग्रोथ करीब 2.7 फीसदी है, जबकि भारत की आर्थिक वृद्धि दर 7 फीसदी या उससे अधिक है। पाकिस्तान की कमजोर अर्थव्यवस्था उसे जोखिम भरे कदम उठाने के लिए उकसा सकती है।

  2. पाकिस्तान टेक्सटाइल और कृषि जैसे क्षेत्रों में भारत से प्रतिस्पर्धा बढ़ाने की कोशिश कर रहा है, जिससे क्षेत्रीय बाजारों में टकराव की स्थिति बन सकती है।

  3. पाकिस्तान ने अमेरिका को अपने खनिज संसाधनों तक पहुंच का प्रस्ताव दिया है और क्रिप्टोकरेंसी से जुड़ा कारोबार भी ऐसी कंपनी को सौंपा है, जिसका संबंध जैकरी विटकॉफ और डोनाल्ड ट्रम्प के बेटों से बताया जा रहा है।

  4. वैश्विक स्तर पर उथल-पुथल का दौर है। सवाल यह नहीं है कि किसे काबू में किया जाए, बल्कि यह है कि उन देशों से कैसे निपटा जाए, जिन्हें नियंत्रित करना आसान नहीं है।

  5. बांग्लादेश ऊर्जा संकट, महंगाई और निवेशकों के भरोसे में कमी जैसी समस्याओं से जूझ रहा है। बांग्लादेश-पाकिस्तान रक्षा समझौतों पर चर्चा भारत के लिए चिंता का विषय है।

  6. कुछ तत्व भारत के पूर्वोत्तर राज्यों को देश से अलग करने की धमकी दे रहे हैं। जमात-ए-इस्लामी जैसी इस्लामिक ताकतों ने हालात को और संवेदनशील बना दिया है।

  7. भारत ने बांग्लादेश के लिए बंदरगाह, रेल और ऊर्जा ग्रिड से जुड़ी कनेक्टिविटी योजनाएं प्रस्तावित की हैं। भारत के लिए एक शांत और स्थिर बांग्लादेश बेहद जरूरी है।

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