नई दिल्ली। Delhi Blast 2025 मामले में बड़ा खुलासा हुआ है। दिल्ली के लाल किला के पास 10 नवंबर को हुए धमाके के पीछे पाकिस्तान समर्थित आतंकी संगठन जैश-ए-मोहम्मद का नया “वाइट कॉलर टेरर मॉड्यूल” सामने आया है। इस मॉड्यूल में डॉक्टर, प्रोफेसर और महिला सदस्य शामिल थे, जो सीधे पाकिस्तानी हैंडलर्स के संपर्क में थे।
मेडिकल और एजुकेशन सेक्टर की आड़ में चल रहा था नेटवर्क
जांच एजेंसियों के अनुसार, यह आतंकी नेटवर्क मेडिकल प्रोफेशन और शैक्षणिक संस्थानों की आड़ में काम कर रहा था। इस मॉड्यूल के तार हरियाणा के फरीदाबाद, जम्मू-कश्मीर के पुलवामा और उत्तर प्रदेश के सहारनपुर जैसे इलाकों से जुड़े पाए गए हैं।
शादी से शुरू हुई साजिश
जांच में खुलासा हुआ है कि इस पूरे नेटवर्क की शुरुआत 4 अक्टूबर को सहारनपुर में हुई एक शादी से हुई थी। यहीं से मॉड्यूल के सदस्यों के बीच संपर्क मजबूत हुआ और धमाके की साजिश रची जाने लगी। इसके बाद समूह ने फौजियों को धमकाने वाले पोस्टर, हथियार और विस्फोटक तैयार करने के साथ-साथ फंडिंग नेटवर्क भी सक्रिय कर लिया।
19 अक्टूबर को दिखे थे जैश के पोस्टर
सुरक्षा एजेंसियों को 19 अक्टूबर को जम्मू-कश्मीर में जैश-ए-मोहम्मद के पोस्टर दिखाई देने के बाद इस मॉड्यूल के सक्रिय होने का सुराग मिला। इसके बाद से NIA, दिल्ली पुलिस स्पेशल सेल और IB ने संयुक्त रूप से जांच तेज कर दी।
महिला डॉक्टर निकली मास्टरमाइंड
जांच में पता चला है कि इस नेटवर्क की सबसे अहम सदस्य डॉ. शाहीन सईद थी। वह सीधे जैश सरगना मसूद अजहर की बहन सादिया अजहर से जुड़ी हुई थी। शाहीन सईद न केवल मॉड्यूल की कोऑर्डिनेटर थी, बल्कि उसने सोशल मीडिया के जरिए कई युवाओं को इस नेटवर्क से जोड़ा था।

