बिलासपुर के ओम नगर क्षेत्र में बीते दो दिन से मानसून की सक्रिय बारिश शुरू होते ही, वार्ड 21 और आसपास की गलियों में तेज जलभराव की स्थिति उत्पन्न हो गई।
गलियां और सड़कें जलमग्न हो गईं, जैसे तालाब बन चुकी हों—गंदा पानी और बहते कीचड़ से आवागमन बाधित।
नाली-नालियों की सफाई समय पर न होने के कारण जल निकासी ठप रही, जिससे स्थानीय लोगों की भारी असुविधा बनी।
वार्ड 21 के पार्षद के लंबे समय से गैरहाज़िर होने और मौजूदा समस्या पर कोई ठोस कार्यवाही न करने से मोहल्ले में शिकायतों की लहर है।
निगम के तैयारियों के वादों पर पानी फिर गया; बारिश की शुरुआती बूंदों से ही शहर के कई क्षेत्रों में जलभराव का संकट सामने आया, जिसका जिम्मेदार पार्षद और निगम अधिकारी दोनों ही हैं।
🗣️ स्थानीय निवासी बताते हैं कि घरों में पानी घुस चुका है और गंदे पानी से कीचड़ फैल रहा है। परिवार समेत रतजगा कर रहे हैं।कहां खाना पकाएं, कहां सोएं, समझ नहीं आ रहा है।मच्छरजनित बीमारियों की संभावना भी बढ़ गई है।
शिकायतों के बावजूद जिम्मेदारों की ओर से केवल आश्वासन मिला—जल्दी ही नालियां साफ़ हो जाएंगी—लेकिन फिलहाल कोई व्यावहारिक कदम नहीं उठाया गया।
⏳ रियल टाइम चेतावनी:
मौसम विज्ञान केंद्र ने अगले दो-तीन दिन “मध्यम से तेज बारिश” की चेतावनी जारी की है—इस बीच नाली सफाई और जल निकासी की व्यवस्था तुरंत आवश्यक है।
✅ *समाधान*
तुरंत नाली-नालियों की मैनुअल या मशीन आधारित सफाई, ताकि जल निकासी मार्ग खुल जाएँ।
मॉनिटरिंग टास्क फोर्स – पार्षद, निगम अधिकारी, स्वास्थ्य विभाग संयोजित होकर समय-समय पर निरीक्षण करें।
स्मार्ट शिकायत व्यवस्था – मोबाइल ऐप, SMS सिस्टम या हेल्पलाइन के माध्यम से नागरिकों की शिकायत तुरंत दर्ज हो और कार्रवाई समयबद्ध हो।
सफाई अभियान – वार्डवार स्वच्छता रैली, 'स्वच्छ ओम नगर' जैसे मुहिम चलाकर निगम को कार्रवाई करनी चाहिए।
ओम नगर की बदहाल स्थिति सिर्फ बारिश का परिणाम नहीं—यह लापरवाही, संज्ञानहीनता और सिस्टम की गड़बड़ी का परिणाम है। यदि पार्षद और निगम अभी नहीं जागे तो आने वाले दिनों में यह पुनः वही 'तालाब’ बन सकता है। प्रशासन को समय रहते सक्रियता, पारदर्शिता और जवाबदेही दिखाकर स्थिति सुधरनी चाहिए—नहीं तो जनता फिर उसी बेबसी में जीवन व्यतीत करेगी।
