सूखे के योद्धा: ये सात वृक्ष बचाएंगे हरियाली और भूजल
बिलासपुर
छत्तीसगढ़ में भीषण गर्मी और गिरते भूजल स्तर के बीच वानिकी विशेषज्ञों ने ऐसे सात वृक्षों की पहचान की है, जो न केवल हरियाली को बनाए रख सकते हैं बल्कि भूजल को भी स्थिर रखने में अहम भूमिका निभा सकते हैं। इन वृक्षों की खासियत यह है कि ये कठोर जलवायु और शुष्क भूमि में भी तेज़ी से बढ़ते हैं और बेहद कम सिंचाई में भी पनप जाते हैं।
उच्च तापमान में तेज़ बढ़वार
नीम और अर्जुन दो ऐसी प्रजातियां हैं जिनकी जड़ें गहराई तक जाती हैं। ये पेड़ न केवल मिट्टी की नमी बनाए रखते हैं बल्कि भूजल स्तर को गिरने से भी रोकते हैं। इन्हें सूखा सहिष्णु माना जाता है और गर्म तथा कठोर भूमि में भी इनकी बढ़वार तेज़ होती है।
रेतीली और शुष्क ज़मीन के रक्षक
बेर, बबूल और सहजन ऐसे वृक्ष हैं जो बेहद कम पानी में भी जीवित रह सकते हैं। यह तीनों प्रजातियां सूखा-प्रभावित क्षेत्रों के लिए उपयुक्त हैं। साथ ही, ये पेड़ मानव और पशुओं दोनों की ज़रूरतों को पूरा करते हैं और पर्यावरणीय दृष्टि से लाभकारी हैं।
करंज और सागौन का महत्व
करंज और सागौन भी इस सूची में शामिल हैं। करंज के बीज जहां बायोडीजल उत्पादन के लिए उपयोगी हैं, वहीं सागौन की लकड़ी आर्थिक दृष्टि से मूल्यवान मानी जाती है। दोनों ही वृक्ष सूखा सहिष्णु हैं और हरियाली बनाए रखने में सक्षम हैं।
विशेषज्ञ की राय
बीटीसी कॉलेज ऑफ एग्रीकल्चर एंड रिसर्च स्टेशन, बिलासपुर के फॉरेस्ट्री साइंटिस्ट अजीत विलियम्स कहते हैं, “वर्तमान जलवायु संकट के परिप्रेक्ष्य में वृक्ष प्रजातियों का चयन अत्यंत महत्वपूर्ण हो गया है। नीम, अर्जुन, बेर, बबूल, सहजन, करंज और सागौन जैसी प्रजातियां कठिन परिस्थितियों में भी तेजी से बढ़ती हैं और स्थानीय पारिस्थितिकी को सुदृढ़ करती हैं। इनका समावेश पौधरोपण योजनाओं में आवश्यक है।”
राज्य की पौधरोपण योजनाओं में इन सात प्रजातियों को शामिल किया जाए, तो आने वाले वर्षों में न केवल हरियाली बढ़ेगी, बल्कि जल संकट से भी राहत मिल सकती है।
