हाल ही में छत्तीसगढ़ में ट्रेनिंग के दौरान एक सब-इंस्पेक्टर अभ्यर्थी की हार्ट अटैक से मौत ने सभी को झकझोर कर रख दिया है। यह घटना इसलिए और भी चौंकाने वाली है क्योंकि वह अभ्यर्थी भर्ती प्रक्रिया के दौरान लंबी कूद, ऊंची कूद और दौड़ जैसी शारीरिक परीक्षाओं में उत्कृष्ट प्रदर्शन कर चुका था। उसने अपनी शारीरिक फिटनेस का प्रमाण भी दिया था, बावजूद इसके इतनी कम उम्र में हार्ट अटैक से उसकी मृत्यु होना एक गहरी चिंता का विषय है।
एक समय था जब हार्ट अटैक को 50 वर्ष से अधिक उम्र के लोगों की समस्या माना जाता था, लेकिन अब स्थिति तेजी से बदल रही है। हाल के वर्षों में यह देखा गया है कि 20 से 25 वर्ष के युवा, जो पूरी तरह स्वस्थ और बीमारियों से दूर माने जाते हैं, अचानक हार्ट अटैक का शिकार हो रहे हैं। सोशल मीडिया पर ऐसे कई वीडियो वायरल होते हैं, जहां लोग डांस करते-करते, गाड़ी चलाते हुए या रोजमर्रा के सामान्य कार्यों के दौरान अचानक गिर जाते हैं और उनकी जान चली जाती है।
चिकित्सकों के अनुसार इस बढ़ती समस्या के पीछे कई कारण हैं — अनियमित दिनचर्या, मिलावटी खानपान, मानसिक तनाव, और शारीरिक गतिविधियों में असंतुलन। फास्ट फूड और प्रोसेस्ड फूड का बढ़ता चलन, देर रात तक जागना, अत्यधिक मानसिक दबाव, और शारीरिक कसरत की कमी ने युवाओं के दिल को कमजोर कर दिया है।
सरकार को इस गंभीर विषय पर गहराई से सोचने और आवश्यक कदम उठाने की जरूरत है। स्वास्थ्य जांच को भर्ती प्रक्रिया और ट्रेनिंग के दौरान और सख्त बनाया जाना चाहिए। साथ ही, युवाओं को संतुलित जीवनशैली अपनाने, सही आहार लेने, नियमित व्यायाम करने और मानसिक तनाव को कम करने के लिए जागरूक किया जाना चाहिए।
समाज के सभी वर्गों को मिलकर इस बढ़ते खतरे से निपटने के लिए स्वास्थ्य के प्रति सचेत होना होगा। यह केवल एक व्यक्ति की समस्या नहीं है, बल्कि एक सामूहिक जिम्मेदारी है। समय रहते यदि ठोस कदम नहीं उठाए गए, तो यह संकट और भी गंभीर हो सकता है।
अमित पाण्डेय
बिलासपुर,छत्तीसगढ़
