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जिले में पहली बार आदतन गांजा तस्करी के आरोपी पर मादक पदार्थ और मन:प्रभावी पदार्थों के अवैध व्यापार की रोकथाम अधिनियम (PIT NDPS अधिनियम) के तहत बिलासपुर संभागायुक्त द्वारा डिटेंशन ऑर्डर

जीपीएम एंटी नारकोटिक्स टास्क फोर्स के प्रयास से आदतन तस्कर रमेश राठौर के विरुद्ध पीआईटी एनडीपीएस एक्ट के तहत डिटेंशन ऑर्डर जारी

गौरेला-पेंड्रा-मरवाही जिले में पहली बार आदतन गांजा तस्करी के आरोपी पर मादक पदार्थ और मन:प्रभावी पदार्थों के अवैध व्यापार की रोकथाम अधिनियम (PIT NDPS अधिनियम) के तहत बिलासपुर संभागायुक्त द्वारा डिटेंशन ऑर्डर जारी किया गया है।

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*प्रमुख बिंदु*

 मादक पदार्थों के अवैध परिवहन पर अंकुश लगाने की शासन की मंशानुरूप पुलिस महानिरीक्षक बिलासपुर रेंज डॉ संजीव शुक्ल के निर्देश पर पुलिस अधीक्षक जीपीएम श्रीमती भावना गुप्ता की मॉनिटरिंग में जिले में कार्यरत एंटी नारकोटिक्स टास्क फोर्स द्वारा मादक पदार्थ और मन:प्रभावी पदार्थों के अवैध व्यापार की रोकथाम अधिनियम (PIT NDPS अधिनियम) के तहत जिले से आदतन तस्करों के विरुद्ध कार्यवाही की जा रही है जिस क्रम में ऐसे बड़े आदतन तस्करों के खिलाफ डिटेंशन ऑर्डर जारी कराने प्रस्ताव बिलासपुर कमिश्नर के समक्ष प्रस्तुत किए गए हैं। 

बिलासपुर संभाग आयुक्त द्वारा गौरेला थाना क्षेत्र के निवासी रमेश राठौर पिता इंदल राठौर उम्र 43 वर्ष निवासी रानीझाप पर प्रतिबंधित मादक पदार्थों की तस्करी में बार-बार संलिप्तता के आरोप पर सुनवाई करते हुए डिटेंशन ऑर्डर जारी किया गया ।

यह जीपीएम जिले का पहला मामला है, जहां किसी आरोपी पर PIT NDPS के तहत कार्यवाही हुई है।

बिलासपुर संभागायुक्त श्री महादेव कांवरे ने सुनवाई बाद डिटेंशन वारंट जारी कर रमेश को छह महीने की जेल की सजा सुनाई है।

*पूर्व आपराधिक गतिविधियां*

रमेश राठौर पर इससे पहले भी मादक पदार्थों की तस्करी के कई आरोप दर्ज किए गए थे। वर्ष 2021 में 1505 किलो गांजा की तस्करी के दौरान भी पकड़ाया था आरोपी और जमानत के बाद भी दुबारा तस्करी में सक्रिय रहा ।

*जांच और सख्त कदम*

डिटेंशन ऑर्डर जारी होते ही रमेश राठौर को थाना गौरेला द्वारा किया गया निरुद्ध, अब की जाएगी अवैध संपत्तियों की गहन जांच।

मादक पदार्थों की तस्करी में शामिल अन्य नेटवर्क की पड़ताल भी जारी है।

*जीपीएम पुलिस अधीक्षक का संदेश*

"यह कार्यवाही समाज को मादक पदार्थों के खतरे से बचाने के लिए एक बड़ा कदम है। आदतन अपराधियों को सख्त संदेश देने के लिए शासन के मंशानूरूप यह जरूरी था।"

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