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भारतीय चिकित्सा पद्धति राष्ट्रीय आयोग द्वारा निर्धारित प्रकृति परीक्षण जाँच शिविर 17 से 23 दिसंबर तक कोटमी में आयोजित

भारतीय चिकित्सा पद्धति राष्ट्रीय आयोग द्वारा निर्धारित प्रकृति परीक्षण जाँच शिविर 17 से 23 दिसंबर तक कोटमी में आयोजित
""संकल्प स्वास्थ्य का,आधार आयुर्वेद का""
पेंड्रा/कोटमी:आयुष मंत्रालय,भारत  सरकार की महत्वपूर्ण जनकल्याणकारी योजना भारतीय चिकित्सा पद्धति राष्ट्रीय आयोग द्वारा निर्धारित देश का प्रकृति परीक्षण अभियान इस बार गौरेला पेंड्रा मरवाही जिले के कोटमी में कृष्णा मेडिकोज परिसर में 17 दिसंबर से 23 दिसंबर तक रोजाना सुबह 11बजे से 04 बजे तक जाँच शिविर आयोजित की जाएगी।जिसमें मुख्य रूप से प्रकृति परीक्षण,शुगर जाँच,बीपी जाँच प्रकृति परीक्षण अभियान के जिला सहसमन्वयक डॉक्टर मृत्युंजय शर्मा शिविर में उपस्थित लोगों का स्वास्थ्य प्रकृति परीक्षण कर मार्गदर्शन करेंगे।देश का प्रकृति परीक्षण "संकल्प स्वास्थ्य का,आधार आयुर्वेद का" प्रकृति के आधार पर ही व्यक्ति की बीमारियों के प्रति संवेदनशीलता तय होती है।
प्रकृति परीक्षण के लाभ -प्रकृति का ज्ञान व्यक्ति के स्वास्थ्य की रक्षा एवं रोगों के उपचार में मदद करता है।प्रकृति के ज्ञान से व्यक्ति अपनी जीवन शैली बना सकता है,जिससे बीमारियां होने की संभावना कम हो जाती है।प्रकृति के आधार पर रोगों का निदान और उपचार किया जाता है,जिससे दवाओं का असर भी ज्यादा होता है।व्यक्ति की प्रकृति उसकेआहार,दवाओं एवं वातावरण के प्रति प्रतिक्रिया को तय करती है।
जिला सह समन्वयक डॉक्टर मृत्युंजय शर्मा ने प्रकृति परीक्षण जाँच शिविर के बारे में बताया कि प्रत्येक व्यक्ति की अपनी एक विशिष्ट प्रकृति स्वभाव होती है,जो गर्भाधान जन्म के समय ही निश्चित हो जाती है।जो कभी नहीं बदलती।प्रकृति परीक्षण आयुर्वेद में एक महत्वपूर्ण विधि है,जिससे व्यक्ति के शरीर के दोषों (वात,पित्त,कफ)के संतुलन को माप कर उसके प्रकृति (स्वभाव)का मूल्यांकन किया जाता है। उक्त जानकारी जिला सह समन्वयक मृत्युंजय शर्मा ने दी है।


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