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जिले में भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ा पीएम आवास, बिना मकान बने ही पैसों की हो गई निकासी,पांच से सात वर्ष बीत जाने के बाद भी, नहीं बन पाया आवास

जिले में भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ा पीएम आवास, बिना मकान बने ही पैसों की हो गई निकासी,
पांच से सात वर्ष बीत जाने के बाद भी, नहीं बन पाया आवास 

 पेण्ड्रा। जिले में देश के प्रधानमंत्री की सबसे महत्वपूर्ण योजना प्रधानमंत्री आवास योजना के नाम पर भ्रष्टाचार थमने का नाम ही नही ले रहा है। ग्रामीणों के लिए बनाए गए प्रधानमंत्री आवास को ग्राम पंचायत के जनप्रतिनिधि व अधिकारियों आपस मे मिलीभगत कर फर्जी कूटरचना करते हुए ग्रामीणों के आवास को पूरा बतालाकर पैसा तो आहरित कर लिया गया पर मौके पर कई सालों से आवास आज भी अधूरा है और ग्रामीण आज भी कच्चे टूटे फूटे मिट्टी के कच्चे मकानों में रहने को मजबूर है। जिले में देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सबसे महत्वपूर्ण योजना प्रधानमंत्री आवास योजना का बुरा हाल है जहा पर गांव के रहने वाले कम पढ़े लिखे आदिवासियों को गांव के ही सरपंच और उनके साथियों के द्वारा कूटरचना कर उनके मकानों को पूरा बतालाकर पैसा आहरित कर लिया गया जबकि मौके पर मकानों से छत गायब है। 
   दरअसल ,पूरा मामला जिले के पेण्ड्रा जनपद पंचायत के दूरस्थ ग्राम बम्हनी का है जहां पर एक नही बल्कि दर्जनों प्रधानमंत्री आवास ऐसे है जो अधूरे है मजे की बात तो यह है कि इन अधूरे प्रधानमंत्री आवास आज के नही बल्कि पिछले 5 से 7 साल पुराने स्वीकृत आवास है इतना ही नही हितग्राहियो की मानें तो इन्हें गाव के सरपंच और उनके साथ रहने वाले लोग बैंक ले जाकर पैसा आहरित करवाते और पैसों को खुद रखकर काम करवाते थे सरपंच बम्हनी के द्वारा तो उन्हें प्रधानमंत्री आवास बनवाने के लिए सिर्फ रेत और सीमेंट उपलब्ध करवाया था जबकि मजदूरी और ईट हितग्राहियो के द्वारा खुद दिया गया था उंसके बाद भी उनके प्रधानमंत्री आवास आज भी आधे अधूरे है। बम्हनी गांव की रहने वाली मान कुँवर बाई जो विधवा है उनका कहना है कि उसने अपने प्रधानमंत्री आवास बनाने का काम सरपंच ने ले लिया था वहीं सात साल बीत गया पर आज तक उनका आवास नही बन पाया जब ये लोग सरपंच के पास जाते है और आवास पूरा नही बना है बनवा दीजिये बोलते है तो सरपंच का कहना रहता है कि सिर्फ तुम्हारा आवास नही है जो अधूरा है गांव में बहुत सारे आवास ऐसे है जो नही बना है। यही नही गांव के ही रहने वाले राम रतन पैकरा का कहना है एक बार नही कई बार वो गांव के सरपंच का चक्कर काटते काटते परेशान हो गया और घर को पूरा करवा दो बोलता रहा पर सालों बीत जाने के बाद भी आवास पूरा नही बनवाया तो वो उसने वो आधे अधूरे आवास पर ही लेंटर की जगह सीमेंट सीट डालकर रहने लायक बनवा लिया। वही जब इस मामले में हम जिला पंचायत कार्यालय के प्रधानमंत्री आवास शाखा में जाकर बम्हनी गांव के आवासो की स्थिति जानी तो हमारे भी होश उड़ गए यहां पर कंप्यूटर में जो हितग्राहियो के मकानों के फोटो अपलोड थी वो पूरे बने मकानों की थी। जिससे साफ अंदाजा लगाया जा सकता है कि इस पूरे मामले में बड़ा फर्जीवाड़ा किया गया है गांव के सरपंच से लेकर जनपद पंचायत के अधिकारियों की भी मामले में संलिप्तता है। क्योंकि प्रधानमंत्री आवास को लेकर शासन स्तर पर जो राशि का भुगतान किया जाता है वो हितग्राहियो के मकानो के अलग अलग निर्माणाधीन के अनुसार भुगतान किया जाता था मकानों के फोटो को जिओ टेक कर उस अनुसार भुगतान की सुविधा थी पर कूटरचना करने वाले लोगो ने पूरे योजना को भ्रष्टाचार में संलिप्त कर दिया है। हालांकि इस गंभीर मामले में जिला पंचायत सीईओ की मानें तो मामला बेहद गंभीर है मामले की जानकारी मिलने पर हमने सीईओ जनपद पंचायत पेण्ड्रा से जवाब मांगा गया है और उसके बाद विधिवत कार्यवाही की जाएगी। हालांकि इस पूरे मामले के सामने आने के बाद हड़कंप जरूर मच गया है क्योंकि शासन प्रशासन के द्वारा इतना फूल प्रुप प्लान बनाकर प्रधानमंत्री आवास का क्रियान्वयन किया जा रहा था और भ्रष्टाचारियों के द्वारा उसमे सेंध लगाकर यह साबित कर दिया गया कि तू डाल डाल तो मैं पात पात, बहरहाल देखने वाली बात होगी कि प्रधानमंत्री आवास योजना में गरीब हितग्राहियो को पक्के कांक्रीट के मकान देने की योजना में इस बड़े फर्जीवाड़े के खुलासे के बाद दोषियों पर प्रशासन क्या कार्यवाही करता है तो गांव के जवाबदार जनप्रतिनिधि सरपंचों की भूमिका जो संदिग्ध है ग्रामीणों ने जिसपर भरोषा किया पर हितग्राहियों के साथ धोखाधड़ी करने के मामले में क्या कार्यवाही करता है। हितग्राही के अपूर्ण प्रधानमंत्री आवास को पूर्ण बताने के लिए फर्जी कूट रचित दस्तावेज शासकीय कार्यालय में जमा कर हितग्राही का पैसा आहरित कर हजम करना न सिर्फ भ्रष्टाचार है बल्कि बीएनएस की धारा 318(4) के तहत अपराध भी नजर आता है देखना यह होगा कि मामला सामने आने के बाद प्रशासनिक अधिकारी अब इस मामले में दोषियों पर क्या कार्यवाही करता है।


1.  हितग्राहियों ने खुद किया था श्रमदान,लेकिन नहीं मिला मकान।।

वहीं ग्राम पंचायत बम्हनी में गरीब हितग्राहियों के अनपढ़ और सीधे साधे होने का फायदा उठाकर उनके सपनों के साथ खिलवाड़ किया गया है. अधूरे आवासों का निर्माण करवाकर उसका सारा पैसा सरपंच और ठेकेदारों पर आपस में बांट लेने का आरोप है. गांव में दर्जनों ऐसे मकान है जो अब तक अधूरे पड़े हैं. अपने आवास निर्माण में हितग्राहियों ने खुद अपने पास से ईंट दी. मकान की नींव खोदने से लेकर दीवाल जोड़ने में भी सहयोग दिया. लेकिन आज भी इनका आवास अधूरा है।

2.  सरकारी सिस्टम पर लगाई सेंध : 

वहीं, अगर बात करें तो सरपंच के ठेकेदारों ने आवास बनाने के लिए सिर्फ रेत और सीमेंट ही दिया.जबकि हितग्राही के खाते में आने वाले सभी पैसों का आहरण खुद कर लिया. नियमत: योजना का पूरा पैसा सरकार ने हितग्राहियों को दे दिया है.लेकिन हकीकत में वो पैसा हितग्राहियों के बजाए ठेकेदार के पास चला गया. इस मामले में हैरानी की बात ये है कि सरकार ने अलग-अलग स्तर पर मकान के जियो टैगिंग और हितग्राही के साथ फोटो अपलोड करने के बाद ही भुगतान की व्यवस्था की है. फिर भी भ्रष्टाचारियों ने सिस्टम को ही सेंध लगा दिया. किसी दूसरे मकान की फोटो अपलोड करके पैसों का आहरण कर लिया गया.कुछ हितग्राहियों ने पक्के छत ना होने पर छ्प्पर लगा लिया।।


3.  पांच साल पहले बने थे मकान :

 छत्तीसगढ़ में प्रधानमंत्री आवास योजना के मकान कांग्रेस शासन के पहले स्वीकृत हुए थे. मतलब हर एक आवास कम से कम 5 साल पुराना है. आश्चर्य की बात ये है कि पिछले 5 सालों से इन गरीब आदिवासियों के अधूरे आवास पर स्थानीय प्रशासन की नजर क्यों नहीं गई ? जबकि शासन ने इस योजना का पूरा पैसा दे दिया है. पूरे मामले पर जिला पंचायत के प्रोजेक्ट डायरेक्टर का कहना है कि इस मामले में सरपंच सहित कई लोगों को नोटिस जारी किया गया है।।


इनका कहना है.........

1.  राम रतन पैकरा, हितग्राही

वहीं इस मामले मे हितग्राही राम रतन पैकरा से चर्चा किया गया तो उन्होंने बताया कि सरपंच और ठेकेदार ने सिर्फ रेत और सीमेंट ही दिया है। वहीं मकान में लगने वाली ईंट भी हमने दी हैं। लेकिन इसके बाद भी मकान पूरा बनाकर नहीं दिया गया.पता करने पर मालूम हुआ कि मकान का सारा पैसा निकाला जा चुका है। 

2.  मानकुंवर हितग्राही

वहीं , बम्हनी गांव की रहने वाली मान कुँवर बाई जो की विधवा है उनका कहना है कि उसने अपने प्रधानमंत्री आवास बनाने का काम सरपंच ने ले लिया था सात साल बीत गया पर आज तक उनका आवास नहीं बन पाया जब ये लोग सरपंच के पास जाते है और आवास पूरा नही बना है बनवा दीजिये बोलते है तो सरपंच का कहना रहता है कि सिर्फ तुम्हारा आवास नही है जो अधूरा है गाव में बहुत सारे आवास ऐसे है जो नही बना है। 

3.  कौशल प्रसाद तेंदुलकर,  प्रोजेक्ट डायरेक्टर जिला पंचायत।।

वहीं इस मामले में जिला पंचायत के प्रोजेक्ट डायरेक्टर कौशल प्रसाद तेंदुलकर से चर्चा करने पर उन्होंने बताया कि प्रधानमंत्री आवास में भ्रष्टाचार की शिकायत मिली थी.जिस पर सरपंच समेत ठेकेदारों को नोटिस जारी किया गया है.कोशिश ये की जा रही है कि गरीबों का आवास पूरा हो.हितग्राहियों को शासन की सुविधा का लाभ मिल सके।

4.  श्रीमती लीना कमलेश मंडावी - कलेक्टर

वहीं जिले की कलेक्टर श्रीमती लीना कमलेश मांडवी से चर्चा की गई तो उन्होंने बताया कि के जिले में जो अधूरे निर्माण कार्य है उनकी सुपरविजन एवं मॉनिटरिंग करके पुर्ण कराने की जिम्मेदारी हमने सभी जनपद पंचायत के सीईओ को दी हुई है लगातार उसकी समीक्षा कर रहे हैं। और राशि आहरण कर या फिर फर्जी आहरण के संदर्भ में जानकारी मिली है उनकी जांच करवा रहे हैं, जैसे ही उसकी जांच रिपोर्ट आएगी। उस जांच रिपोर्ट के आधार पर फिर हमारे द्वारा कार्यवाही की जाएगी।

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