नारी शक्ति से जल शक्ति" विषय पर आधारित राज्य स्तरीय एक दिवसीय रासेयो कार्यक्रम अधिकारीयों का प्रशिक्षण कार्यशाला
छत्तीसगढ़ शासन, उच्च शिक्षा विभाग- राष्ट्रीय सेवा योजना प्रकोष्ठ एवं इंदिरा गाँधी कृषि विश्वविद्यालय, रायपुर की संगठन व्यवस्था में नारी शक्ति से जल शक्ति कार्यक्रम के अंतर्गत राज्य के रासेयो महिला कार्यक्रम अधिकारियों का राज्य स्तरीय एक दिवसीय प्रशिक्षण कार्यशाला का आयोजन इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय, रायपुर के स्वामी विवेकानंद सभागार में 10 जुलाई 2024 को किया गया। यह राज्य में पहला आयोजन है जिसमें महिला कार्यक्रम अधिकारियों के लिए प्रशिक्षण कार्यशाला का आयोजन किया जा रहा जिसमें राज्य के 300 से अधिक महिला कार्यक्रम अधिकारियों को राष्ट्रीय सेवा योजना संबंधित विभिन्न विषयों एवं भारत सरकार के फ्लैगशिप कार्यक्रम नारी शक्ति से जल शक्ति कार्यक्रम के संदर्भ में प्रशिक्षण प्रदान किया गया।
कार्यक्रम के प्रथम सत्र में महिला कार्यक्रम अधिकारियों का प्रशिक्षण का रहा जिसमें डॉ डी एल पटेल, कार्यक्रम समन्वयक, शहिद महेंद्र कर्मा विश्वविद्यालय, जगदलपुर ने राष्ट्रीय सेवा योजना के नियमित गतिविधि के अंतर्गत किए जाने वाले कार्य एवं इससे संबंधित योजनाओं के बारे में विस्तृत में चर्चा करते हुए प्रशिक्षण प्रदान किया गया। साथ ही डॉ आर पी अग्रवाल, कार्यक्रम समन्वयक, हेमचंद यादव विश्वविद्यालय दुर्ग ने अपने व्याख्यान में विशेष शिविर के आयोजन हेतु विस्तृत चर्चा किया। जिसमें अपने वक्तव्य में कहा कि रासेयो सात दिवसीय विशेष शिविर अकास्मिक आयोजित नहीं किया जा सकता है, इसके लिए पूर्वायोजन या शिविर पूर्व तैयारी किया जाना आवश्यक है।
विशेष शिविर चुनौतियों से भरा शिविर होता है, शिविर आयोजन पूर्व हमें शिविर हेतु स्थल चयन के लिए उस स्थल का सर्वे करना बहुत आवश्यक होता है। सर्वे उपरांत स्थानीय निवासियों के साथ बैठक कर शिविर आयोजन के लिए चर्चा किया जाना चाहिए।
शिविर में बौद्धिक कार्यकम के आयोजन के लिए किन किन विभाग की अधिकारी के अधिकारियों का व्याख्यान रखा जाना है, इसके लिए भी पूर्व तैयारी किया जाना बहुत आवश्यक है। शिविर में ऐसे कार्यों का आयोजन किया जाना जिससे गांव में एन एस एस का छाप छोड़े। सरकार की महत्वाकांक्षी योजनायों के साथ साथ राष्ट्रीय सेवा योजना का प्रचार प्रसार किया जाना चाहिए।
प्रथम सत्र पश्चात राज्य स्तरीय महिल कार्यक्रम अधिकारी प्रशिक्षण कार्यशाला का उद्घाटन सत्र का आयोजन किया गया जो मुख्य अतिथि डॉ गिरीश चंदेल, कुलपति, इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय, रायपुर एवं सारस्वत अतिथि डॉ. संजय शर्मा, अधिष्ठाता छात्र कल्याण, इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय, रायपुर, डॉ अनिल कुमार, सामाजिक कार्यकर्ता एवं पर्यावरणविद, एवं डॉ नीता बाजपेयी, राज्य एन एस एस अधिकारी के आतिथ्य में सम्पन्न हुआ। उद्घाटन समारोह में डॉ. संजय शर्मा सभा को संबोधित करते हुए कहा कि यह कार्यक्रम नारी शक्ति से जल शक्ति जो कि प्रमुख रूप से जल संरक्षण से संबंधित है, जो वास्तव में एक बहुत बढ़िया प्रशिक्षण का आयोजन है। आज हमारे देश में ही नहीं बल्कि पूरे विश्व में पर्यावरण प्रदूषित हो रहा है। आज जल संकट होने लगा है जिसके लिए हम सभी को संयुक्त रूप से जागरूक होकर प्रयास करना होगा।
उद्घाटन के मुख्य अतिथि डॉ गिरीश चंदेल कुलपति ने महिला कार्यक्रम अधिकारियों को संबोधित करते हुए कहा कि जल की बिना जीवन नहीं है, जल संरक्षण के लिए नारी शक्ति का बहुत बड़ा योगदान है। यह प्रशिक्षण वास्तव में बहुत ही लाभकारी है
जल प्रदूषण या वायु प्रदूषण के लिए मानव ही जिम्मेदार है। इसलिए हम मानव जाति को ही सबसे ज्यादा पर्यावरण संरक्षण के लिए प्रयास करना होगा। अगर हम इसी तरह पर्यावरण को प्रभावित करते रहेंगे तो भविष्य की पीढ़ी को अपने साथ गैस सिलेंडर लेके चलना पड़ेगा। हम सभी को स्वयं जागरूक होकर देश के अन्य लोगों को जागरूक करना होगा। साथ ही विश्वविद्यालय परिसर में कार्यशाला के आयोजन के लिए धन्यवाद दिया।
कार्यशाला का तृतीय सत्र व्याख्यान का रहा जिसमें मुख्य वक्ता डॉ अनिल कुमार, सामाजिक कार्यकर्ता एवं पर्यावरणविद रहे, डॉ अनिल कुमार ने नारी शक्ति से जल शक्ति विषय पर अपना वक्तव्य दिया। उन्होंने संबोधित करते हुए कहा कि पर्यावरण संरक्षण हम सब की जिम्मेदारी है । जिस तरह हम अपने पैसे का हिसाब किताब रखते हैं, उसी तरह हमे अपनी प्राकृतिक संसाधन का भी हिसाब किताब रखना होगा। हम एक तरफ भारत माता, गंगा माता का जय जयकार करते हैं और दूसरी तरफ उसी भारत माता, गंगा माता के ऊपर कचरा डाल रहे हैं। हम सब की नैतिक जिम्मेदारी है कि पर्यावरण संरक्षण के लिए हैं सभी एकजुट होकर आगे आएं। पर्यावरण को नुकसान पहुंचाने वाला आज सिग्नल यूज प्लास्टिक का प्रयोग करना किसी पाप से कम नहीं। बहुत सारी माता बहनों ने इस धरती को बचाने के लिए बलिदान दिया है।
कार्यक्रम के चतुर्थ सत्र खुला मंच का रहा जिसमें जिसमें उपस्थित कार्यक्रम अधिकारी और जिला संगठकों ने अपने अपने विचार व्यक्त किया एवं रासेयो अनुभवों का साझा किया गया।
साथ ही कार्यक्रम अधिकारियों ने रासेयो संबंधित प्रश्न किए जिसका उत्तर डॉ नीता बाजपेयी, राज्य एन एस एस अधिकारी ने बड़े ही सौम्य और सरलता से दिया।
अंतिम सत्र समापन समारोह का रहा जिसमें मुख्य अतिथि डॉ. जी. के. दास, अधिष्ठाता, कृषि महाविद्यालय, रायपुर एवं सारस्वत अतिथि डॉ आर पी अग्रवाल, कार्यक्रम समन्वयक, हेमचंद यादव विश्वविद्यालय दुर्ग, डॉ. मनोज सिन्हा, कार्यक्रम समन्वयक अटल बिहारी विश्वविद्यालय बिलासपुर, डॉ. डी एल पटेल, कार्यक्रम समन्वयक, शहीद महेंद्र कर्मा विश्वविद्यालय जगदलपुर रहे जिसमें मुख्य अतिथि ने अपने संबोधन में पर्यावरण विज्ञान एवं मौसम विज्ञान संबंधित अनुभवों को साझा किया। और नारी शक्ति से जल शक्ति विषय में संबोधित करते हुए पर्यावरण संरक्षण के लिए आवाह्न किया।
अंत में प्रशिक्षण कार्यशाला में प्रतिभागी महिला कार्यक्रम अधिकारियों को प्रतिभागी प्रमाण पत्र प्रदान कर सम्मानित किया गया।
उक्त कार्यक्रम में राज्य के रासेयो युक्त विश्वविद्यालयों के कार्यक्रम समन्वयक, जिला संगठक सहित अटल बिहारी वाजपेयी विश्वविद्यालय बिलासपुर के कार्यक्रम समन्वक डॉ मनोज सिन्हा, बिलासपुर जिला संगठक श्रीमति कांति अंचल एवं कार्यक्रम अधिकारियों में सुश्री मोना केवट, शिल्पा यादव, सुमोना भट्टाचार्य, संस्कृति शास्त्री, देवहुति कुंजाम, निर्मला बंजारे, जागृति, अनीता पटेल, की उपस्थिति रही।
