सेहत के लिए आम से बेहतर है बबूल बीज
बिलासपुर-' बोया पेड़ बबूल का, तो आम कहां से होय'। सच है कि बबूल के पेड़ पर आम नहीं लगते लेकिन उतना ही सच है यह भी है कि बबूल की फलियां आम से ज्यादा स्वादिष्ट और सेहत के लिए जरूरी गुण से भरपूर होतीं हैं। 
बबूल के पेड़ों में फलियांं लग चुकीं हैं। पशु आहार के काम आने वाली फलियों पर हुए अनुसंधान में इसके बीज में आम से ज्यादा पोषक तत्वों की मौजूदगी का खुलासा हुआ है। अहम यह है कि पोषक तत्व की मात्रा आम से कहीं ज्यादा होते हैं। बीज नहीं, पत्तियां में भी महत्वपूर्ण औषधिय गुण मिले हैं।
इसकी फली सबसे भली
बबूल के बीज की 1 किलो की मात्रा में 234 ग्राम क्रूड प्रोटीन, 126 ग्राम क्रूड फाइबर, 66.06 ग्राम क्रूड वसा, 534 ग्राम कार्बोहाइड्रेट तो होते हैं। मिनरल्स की भी अच्छी-खासी मात्रा की मौजूदगी प्रमाणित हुई है। जिसके अनुसार पोटेशियम, मैग्नीशियम, आयरन का होना पाया गया है। 
अर्क बनते हैं छाल से
बबूल बीज और छाल से जो अर्क बनते हैं, उससे कीटनाशक का प्रभाव नियंत्रण में रखा जाता है। अर्क का उपयोग सिंथेटिक प्रिजर्वेटिव की मात्रा कम करने के काम में किया जाता है। पत्तियों का सेवन पाचन क्रिया को दुरुस्त रखने में कारगर माना गया है। यही वजह है कि बीज और पत्तियों से मवेशियों के लिए आहार बनाए जाते हैं। 
बनाए रखता है जैव विविधता
सूखा और बाढ़ जैसी प्रतिकूल परिस्थितियों में सहनशील बबूल, हवा से नाइट्रोजन लेकर जमीन तक पहुंचाता है। यह प्रक्रिया भूमि को बंजर होने से बचाती है और मरुस्थलीकरण जैसी प्रक्रिया के फैलाव को रोकती हैं। यही वजह है कि बबूल के पौधों का रोपण, खनन क्षेत्र में करने की सलाह दी गई है। यहां यह बेहतर परिणाम देने वाले माने गए हैं।
औषधिय गुणों का भंडार है बबूल 
बबूल का पेड़ औषधिय गुणों का भंडार होता है। हीलिंग ट्री के नाम से प्रसिद्ध पेड़ की फली जोड़ों के दर्द में कारगर है। एंटी इन्फ्लेमेटरी गुणों से भरपूर बीज जोड़ों में सूजन और दर्द को कम करती है। किंतु उपयोग के पूर्व चिकित्सीय परामर्श आवश्यक है।
अजीत विलियम्स, साइंटिस्ट (फॉरेस्ट्री) बीटीसी कॉलेज ऑफ़ एग्रीकल्चर एंड रिसर्च स्टेशन, बिलासपुर
