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रोकते हैं प्रदूषण, देते हैं प्राणवायु 21 प्रजातियों के पौधे तैयार रोपण के लिए शीघ्र बढ़वार लेती है यह प्रजातियां

रोकते हैं प्रदूषण, देते हैं प्राणवायु

 21 प्रजातियों के पौधे तैयार रोपण के लिए

 शीघ्र बढ़वार लेती है यह प्रजातियां


बिलासपुर- नीम, महानीम, सफेद और काला सिरस सहित 17 ऐसी प्रजातियों के पौधे रोपण के लिए तैयार हैं, जो शीघ्र बढ़वार लेते हैं। पर्यावरण हितैषी यह प्रजातियां पहली बार चालू माह के पहले सप्ताह से ही मांग में हैं। 

शासकीय योजनाएं अपनी जगह हैं। स्वयंसेवी संगठन भी लगभग पूरे साल पौधरोपण करते हैं। लेकिन पहला साल है, जब भीषण गर्मी ने मजबूती के साथ एहसास करवा दिया है कि वृक्षों की अहमियत जीवन में कितनी है ? यही वजह है कि पौधरोपण में इस बार ऐसी प्रजातियां नजर में आएंगी, जो पर्यावरण के लिहाज से बेहद अहम स्थान रखती हैं।


अहम हैं यह प्रजातियां 

नीम, महानीम, काला और सफेद सिरीस, कदंब, करंज, कांटा बांस और ठोस बांस, सिस्सु, सेमल, अमलतास, नीलगिरी, बकायन, सहजन, जंगल जलेबी, कपोक, जामुन, अर्जुन, आंवला, सीताफल और खम्हार। ऐसी प्रजातियां हैं, जो कम देखरेख में भी शीघ्र बढ़वार लेती है। घनी छाया देने वाली इन प्रजातियों के पौधे छोटे शहरों में खूब मांग में हैं। 


रोकते हैं प्रदूषण, देते हैं प्राणवायु

वानिकी वैज्ञानिकों ने अनुसंधान के बाद जो परिणाम साझा किए हैं उसके अनुसार यह प्रजातियां न्यूनतम देख-रेख में तैयार हो जाती हैं। वायु प्रदूषण को रोकने में सक्षम यह वृक्ष, जल और मिट्टी संरक्षण करने में सक्षम है। यही वजह है कि इनके रोपण प्रभावित क्षेत्रों में करने की सलाह दी जा रही है।

संरक्षण और संवर्धन जरूरी

पौधरोपण को लेकर जैसा रुझान शासकीय और निजी क्षेत्र दिखा रहें हैं, उसे अच्छा माना जा रहा है लेकिन रोपण के बाद सूखते पौधे, खरपतवार से अटे ट्री-गार्ड यह बताते हैं कि योजना केवल रस्म अदायगी  और तस्वीर खिंचवाने तक ही सीमित हो जा रही है। ऐसे में अहम है संरक्षण की जिम्मेदारी लेने की। 

एक्सपर्ट व्यू

पेड़ बचेंगे, तभी बचेगी दुनिया

पेड़ों का महत्व न केवल पर्यावरण की स्थिरता सुनिश्चित करने के लिए नहीं, बल्कि आर्थिक लाभ की दृष्टि से भी अत्यंत उपयोगी है। वन पारिस्थितिकी प्रणाली समाज के विकास एवं खुशहाली, दोनों के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण उत्पादक तथा रक्षात्मक कार्य पूरी करती है। पेड़-पौधों के बिना हम अपने जीवन की कल्पना नहीं कर सकते। 
अजीत विलियम्स, साइंटिस्ट (फॉरेस्ट्री), बीटीसी कॉलेज ऑफ़ एग्रीकल्चर एंड रिसर्च स्टेशन, बिलासपुर

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