बिलासपुर। देह दान जैसे महान पुनीत कार्य बिरले ही लोग कर पाते हैं या कहे बिरले लोगों के भाग्य में यह महान पुनीत कार्य लिखा होता है ।इसी कड़ी में आज ग्राम मोछ के प्रतिष्ठित व्यक्ति स्व. देवनाथ सिंगरौल ने मृत्यु के पूर्व देहदान की इच्छा प्रकट करने की बात कहे थे । उन्होंने अपने परिवार जन से कि मेरे इस नश्वर शरीर को मेडिकल छात्रों को समर्पित कर भविष्य की दिशा तय करने में कार्य योजना बनाने में चिकित्सा क्षेत्र में अनुसंधान हेतु अर्पित कर दिया जावेगा ।जिसकी प्रतिपूर्ति उनके समाज सेवी सुपुत्र डॉ जितेन्द्र सिंगरौल ने आज 10/02/2024 को उनके 86 वर्ष की उम्र में आकस्मिक निधन उपरांत शासकीय आयुर्वेद महाविद्यालय बिलासपुर को अविलंब सूचित किए, तदुपरांत शासकीय आयुर्वेद महाविद्यालय बिलासपुर से डॉ. प्रशांत निषाद एवं डॉ. निशांत कौशिक की टीम ग्राम मोछ पहुँचकर पार्थिव शरीर की औपचारिकताएँ पूर्ण कर अनुसंधान केंद्र कोनी हेतु अपने साथ ले गए। देहदान की यह प्रक्रिया ग्रामीण अंचल में संभवतः पहला एवं ऐतिहासिक पहल है, जो सर्व समाज के लिए प्रेरणादायक है। उनका प्रतीकात्मक शव दाह गृह ग्राम मोछ में कुर्मी पुरोहित श्री लक्ष्मीनारायण कश्यप (पाली) के द्वारा विधि विधान से क्रिया कर्म सामाजिक रीति नीति से संपादित किया गया। तत्पश्चात् श्रद्धांजलि सभा का आयोजन हुआ जिसने दिवंगत की शांति के लिए प्रार्थना की गई एवं शोक संतप्त परिवार के लिए संवेदना व्यक्त किया गया। विदित होगी चिकित्सकों का मानना है एक देह दान से लगभग 100 चिकित्सक अध्ययन के दौरान मृत देह प्रयोगद्वारा डॉक्टर बनते हैं। आज इस दुःखद घड़ी में समाज के प्रबुद्धजन, सामाजिक पदाधिकारीगण एवं कुर्मी समाज के विभिन्न फिरकों से सामाजिक सदस्यगण उपस्थित रहे, जिनमें बी आर कौशिक, जगदीश कौशिक, डॉ. निर्मल नायक, प्रमोद पाटनवार, देवनारायण कश्यप, सुरेश कौशिक, जयप्रकाश सिंगरौल, लक्ष्मीकान्त कौशिक, गणेश कौशिक एवं विभिन्न गणमान्यजन उपस्थित रहे।
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